बरेली: विपत्तिकाल में होती है व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा
अमृत विचार, बरेली: श्रीहरि मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा का विधिवत समापन हो गया। शुक्रवार को कथाव्यास पं. ब्रजेश पाठक ने कहा कि अनुकूल परिस्थितियों में धर्म का आचरण करना आसान है। लेकिन इसके लिए धैर्य की अपेक्षा होती है। व्यक्ति के धैर्य की परीक्षा विपत्ति काल में ही होती है। बताया कि जिस समय श्रीराम को वनवास प्राप्त हुआ।
ये भी पढ़ें - बरेली: मंडलीय जूनियर बॉक्सिंग की टीम चयनित
मां कौशल्या के धैर्य की परीक्षा की घड़ी आ गई। एक ओर उनका स्त्रीधर्म और दूसरी तरफ पुत्र प्रेम। यदि वह अपने अधिकार का प्रयोग करके श्रीराम को रोकती तो पति की अवज्ञा होती और जाने देती तो उनका हृदय टूटता। माता सुमित्रा ने भी धैर्य धारण कर अपने पुत्र लक्ष्मण को श्रीराम की सेवा में भेज दिया। उनके धैर्य के कारण ही लक्ष्मण को श्रीराम की सेवा का अवसर प्राप्त हुआ।
इस दौरान संगीतमय भजनों की धुन पर श्रद्धाभाव के साथ श्रद्धालु झूमते रहे। कथा में मंदिर समिति के अध्यक्ष सतीश खट्टर, उपाध्यक्ष सुशील कुमार, रवि छाबड़ा, संजय आनंद, अश्वनी ओबराय, गोविंद तनेजा, अनिल चड्ढ़ा आदि लोग उपस्थित रहे।
ये भी पढ़ें - बरेली: स्प्रिंकलर और ड्रिप पद्धति अपनाकर खेती में बचाएं पानी
