बेटी की आबरू बचाने के लिए चड़ीगढ़ में जीवनसाथी का किया कत्ल, कानपुर सेंट्रल पर पुलिस ने मां-बेटी को ऐसे दबोचा
चड़ीगढ़ में पति की हत्या करने वाली मां-बेटी कानपुर सेंट्रल से गिरफ्तार।
चड़ीगढ़ में पति की हत्या करने वाली मां-बेटी कानपुर सेंट्रल से गिरफ्तार कर लिया। चंडीगढ़ में वारदात को अंजाम दिया। पति को गला दबाकर मारने का आरोप।
कानपुर, अमृत विचार। एक पत्नी पर आरोप है कि उसने अपनी बेटी की आबरू बचाने के लिए खुद अपने जीवनसाथी की गला दबाकर हत्या कर दी। पति की हत्या करने के बाद महिला अपनी बेटी के साथ वहां से फरार हो गई। अपने घर बिहार जाते हुए उसे कानपुर जीआरपी ने पकड़ा। जीआरपी को चंडीगढ़ पुलिस ने महिला की लोकेशन भेजी थी। आरोपी मां और बेटी को क्राइम ब्रांच के हवाले कर दिया गया है।
जीआरपी थाना प्रभारी आरके द्विवेदी ने जानकारी दी कि पूरा मामला चंडीगढ़ के थाना सेक्टर 34 का है। महिला रूबी पर आरोप है कि उसने अपने ही पति की गला दबाकर निर्मम हत्या कर दी। उसके बाद लाश को घर में ही छुपाकर फरार हो गई। महिला ट्रेन से अपने मूल गांव बिहार जा रही थी। जिसपर महिला को सियालदाह जलियांवाला बाग ट्रेन से कानपुर सेंट्रल पर रविवार देर रात गिरफ्तार कर लिया गया।
पूछताछ में महिला ने बताया कि उसका पति मंटू उसकी बेटी से आए दिन छेड़खानी करता था। जिसका वे विरोध करती थी। हत्या वाले दिन भी उसके पति ने बेटी बुरी नियत से दबोचा जिसपर दोनो लोगों में झगड़ा हुआ। बेटी को लेकर पहले भी दोनो में झगड़ा होता रहता था। रूबी ने कबूल किया है कि बेटी को बचाने के लिए उससे यह बुरा काम हो गया। महिला से अब क्राइम ब्रांच पूछताछ करेगी।
महिला ने की थी दूसरी शादी
महिला ने पूछताछ में यह भी बताया है कि मंटू उसका दूसरा पति है। इससे पहले भी उसकी एक शादी हो चुकी है जिससे यह बेटी है। यही वजह है कि शराब पीने के बाद उसका पति उसकी बेटी से बुरा काम करने के लिए पहले भी कई बार प्रयास कर चुका था। बेटी को गड़ा होते देख उसकी आबरू बचाने के लिए उसने यह काम किया है।
बेटी से बढ़कर कोई नहीं
महिला ने जीआरपी को यह भी बताया कि वे अपनी बेटी को सबसे अधिक चाहती है। ऐसे में वे अपनी बेटी के लिए कुछ भी कर सकती है। बेटी का ही भविष्य बनाने के लिए वे बिहार से चंडीगढ़ आई थी। यहां पर वे मजदूरी कर अपना जीवन चलाती थी। पति ज्यादातर अपना पैसा शराब में ही लुटा देता था। इस स्थिति में जब उसने बेटी पर बुरी नियत डालनी चाही तो उससे यह बर्दाश्त नहीं हुआ।
