बाजपुरः 15 वर्षों से निवासरत लोगों के जाति प्रमाण पत्र देने की मांग, तहसीलदार का किया घेराव
बाजपुर, अमृत विचार। उत्तराखंड में पिछले 15 वर्षों से निरंतर निवासरत लोगों को जाति प्रमाण पत्र निर्गत किए जाने की मांग को लेकर पालिकाध्यक्ष गुरजीत सिंह गित्ते ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने इसको लेकर समर्थकों के साथ तहसीलदार का घेराव किया। उन्होंने जाति प्रमाणपत्र प्रक्रिया को सरल बनाने व इसमें आ रही बाधाओं को दूर करने की मांग की गई। उन्होंने जनहित के इस मामले का समय रहते निस्तारण न होने की दशा में जन आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।
पालिकाध्यक्ष गुरजीत सिंह गित्ते के नेतृत्व में लोग मंगलवार को तहसील कार्यालय जा धमके और वहां मौजूद तहसीलदार अक्षय कुमार भट्ट का घेराव किया। उनका कहना था कि जाति प्रमाण पत्र निर्गत करने के लिए राजस्व विभाग द्वारा 1985 से उत्तराखंड में रहने के साक्ष्य उपलब्ध करवाने को कहा जा रहा है, जबकि ऐसा कोई भी शासनादेश व जीओ नहीं है। जिसकी वजह से अधिकांश लोगों को विशेषकर युवाओं को भारी असुविधाओं का सामना करना पड़ रहा है। जाति प्रमाणपत्र के अभाव में नौजवान सरकारी नौकरी के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे हैं।
चेयरमैन गुरजीत सिंह गित्ते ने उत्तराखंड में पिछले 15 वर्षों से निवास कर रहे नागरिकों के जाति प्रमाण पत्र बनाए जाने की पुरजोर मांग की है। वहीं तहसीलदार अक्षय कुमार भट्ट ने कहा कि वर्ष 2013 के शासनादेश के अनुसार ही जाति प्रमाणपत्र बनाने की प्रक्रिया अमल में लाई जा रही है। परिवार के किसी सदस्य को पूर्व में जाति प्रमाणपत्र निर्गत हुआ है तो आवेदनकर्ता उसकी छायाप्रति अनिवार्य रूप से आवेदनपत्रों के साथ लगाएं।
राजस्व उप निरीक्षकों के माध्यम से स्थलीय निरीक्षण करवाकर नियमानुसार जो भी संभव हो सकेगा जनहित में निर्णय लिया जाएगा। बताया कि इसके लिए उन्होंने राजस्व उपनिरीक्षकों को तत्काल निर्देशित भी कर दिया है। तहसीलदार ने क्षेत्रवासियों से कहा कि प्रमाण पत्रों को लेकर किसी भी प्रकार की परेशानी होने पर उनसे सीधे संपर्क किया जा सकता है जिसमें आमजन को किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं होने दी जाएगी।
इस मौके पर ओम शिव कांवड़ दल के महंत राजेंद्र कुमार उर्फ बंटी ठक्कर, व्यापारी नेता संजय रूहेला, सभासद जगतजीत सिंह, सुनील कुमार, रामअवतार यादव, नंदलाल यादव, विवेक पांडेय, वाजिद अली, एडवोकेट विजय गर्ग, नत्था सिंह धवन, आसिफ कुरैशी आदि मौजूद थे।
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