बढ़ता पारा
देश में गर्मी की लहरें घातक दर से बढ़ रही हैं। भीषण गर्मी सार्वजनिक स्वास्थ्य के साथ-साथ जीवन और आजीविका के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। इससे श्रमिकों की उत्पादकता प्रभावित होती है। परिणाम स्वरूप कमाई पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उत्तर प्रदेश में सप्ताह के अंत तक प्रचंड गर्मी से राहत के कोई आसार नहीं है। झांसी में पारा 45 डिग्री सेल्सियस को पार कर गया है।
पिछले 24 घंटे में प्रयागराज व कानपुर में 45.1,आगरा व बांदा में 43. 8 हमीरपुर में 43.2, फतेहपुर में 43.6 और लखनऊ में 41 डिग्री सेल्सियस रहा। राज्य में भीषण गर्मी को देखते हुए परिषद द्वारा संचालित स्कूलों में गर्मी की छुट्टी 26 जून तक बढ़ा दी हैं। आईएमडी के अनुसार राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लोगों को भीषण गर्मी का सामना करना पड़ा और अधिकतम तापमान सामान्य से एक डिग्री अधिक 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
मौसम विभाग के मुताबिक इस दौरान दक्षिणी और पश्चिमी इलाकों में हल्की बूंदाबांदी के आसार हैं हालांकि इससे तापमान में कोई खास बदलाव नहीं पड़ेगा। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि तापमान इतना क्यों बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक मौसम के चक्र में बदलाव और बढ़ते तापमान की सबसे बड़ी वजह जलवायु परिवर्तन है। यानि जलवायु परिवर्तन ने बढ़ते तापमान को रोकना लगभग असंभव बना दिया है। शहरीकरण तेजी से बढ़ रहा है। हरियाली कम हो रही है और इमारतों की तादाद बढ़ रही है। पेड़ कट रहे हैं। दूसरी तरफ प्रदूषण भी लगातार बढ़ रहा है। वाहनों से निकलने वाले धुएं की वजह से पर्यावरण दूषित हो रहा है। अगर हमने बदलते मौसम के साथ अपनी जीवन शैली में बदलाव नहीं किया तो स्थिति बिगड़ सकती है।
मौसम के बदलने के हिसाब से हमें अपने भोजन और रहने के तरीकों को भी सुधारना होगा। इस बीच भीषण गर्मी के मद्देनजर चिकित्सकों ने सलाह दी है कि सुबह 11 बजे से शाम चार बजे के बीच जरूरी काम से ही घर अथवा दफ्तर से बाहर निकलें। पेट को पानी से भरा रखें। बासी और तला भुना खाने से परहेज रखें। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक की सलाह के अनुसार ही दवाओं का सेवन करें। बिगड़ते मौसम की चंचलता प्रभावी हस्तक्षेप से बच सकती है। इसलिए सबसे अच्छी उम्मीद शमन रणनीति में निहित है। शहरी बुनियादी ढांचे को कांच और कंक्रीट से दूर रखना चाहिए और पारंपरिक शीतलन प्रणाली को फिर से अपनाना चाहिए। नहीं तो आने वाले दिनों में हालात गंभीर हो सकते हैं।
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