लखनऊ में चाइनीज मांझा बना जान की आफत, दो बच्चों की कटी गदर्न
लखनऊ। राजधानी में पतंग के चाइनीज मांझे का कहर लगातार जारी है। आए दिन कोई न कोई मांझे का शिकार हो रहा है। बावजूद इस पर कोई सख्ती नहीं हो पा रही है। रविवार को गोमतीनगर स्थित लोहिया फ्लाईआवेर में कार के ऊपर सतह के ओपन डोर (सन रुफ) में खड़े दो बच्चे चाइनीज मांझे की चपेट में आ गए। उनकी गर्दन पर गहरा घाव हो गया। आनन-फानन बच्चों को लोहिया अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
छुट्टियों में ननिहाल आए थे बच्चे
पंतनगर कालोनी खुर्रमनगर निवासी हरीश राजपूत ने बताया कि बेटी सुशोभिता सिंह बरेली में पीलीभीत बाईपास रोड पर सपरिवार रहती है। हफ्ते भर पहले बेटी सुशोभिता बेटे रियान सिंह (08) और बेटी गौरी (11) संग गर्मियों की छुट्टियों में बेटी बच्चों के संग लखनऊ आई हैं। उन्होंने बताया कि रविवार दोपहर बच्चे अपनी मौसी हार्षिता सिंह और मौसा नवनीत सिंह के साथ कार से घूमने निकले थे।
बच्चे कार की ऊपर सतह के ओपन डोर (सन रुफ) में खड़े थे। इस बीच एक चाइनीज मांझा बच्चों की गर्दन में उलझ गया। जिससे उनकी गर्दन में गंभीर घाव हो गए। आनन-फानन बच्चों को राम मनोहर लोहिया संस्थान में भर्ती कराया गया। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, गौरी के गले में बीस टांके आए है। जबकि बहन को बचाने की कोशिश में रियान हाथ में चोट आईं है। सोसाइटी के रहने वाले आनंद चंदोला ने बताया कि वह भी पतंग के मांझे से जख्मी हो चुके हैं।
चाइनीज माँझे की बिक्री पर है बैन
एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ) ने चाइनीज मांझे के निर्माण व प्रयोग पर वर्ष 2017 से ही बैन लगा दिया है। इस बैन में साफ कहा गया है कि पतंग उड़ाना एक परंपरागत शौक है लेकिन कोई भी शौक किसी के भी जीवन को नुकसान नही पहुंचा सकता है ।इस आदेश में यह भी कहा गया है कि पतंग उड़ाने में चाइनीज मांझे का प्रयोग कानून अपराध है। इस खतरनाक मांझे से आसमान में उड़ने पक्षियों व जमीन पर रहने वाले पशुओं को भी खतरा है।
अब पहले की तुलना में चाइनीज मांझे का प्रयोग कम किया जा रहा है। पुलिस जहां भी चाइनीज मांझे के प्रयोग की सूचनाएं मिलती है वहां तत्काल कानूनी कार्रवाही अमल में लायी जाती है... डॉ.हृदेश कुमार, डीसीपी पूर्वी।
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