बरेली: घरों में गूंजी हुसैनी सदाएं, सड़कों पर रहा सन्नाटा

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। मुहर्रम की 10 तारीख का मंजर हमेशा से थोड़ा जुदा रहा। शहर से देहात तक तख्त-ताजियों के जुलूस निकले, न कर्बला पर अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा। इस बीच घरों में हुसैनी सदाएं गूंजती रहीं। इमामबाड़ों पर भी चंद लोग पहुंचे। नियाज दिलाई। रोजा रखा। इबादत और तिलावत की। मस्जिदों में हजरत इमाम …

बरेली, अमृत विचार। मुहर्रम की 10 तारीख का मंजर हमेशा से थोड़ा जुदा रहा। शहर से देहात तक तख्त-ताजियों के जुलूस निकले, न कर्बला पर अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ा। इस बीच घरों में हुसैनी सदाएं गूंजती रहीं। इमामबाड़ों पर भी चंद लोग पहुंचे। नियाज दिलाई। रोजा रखा। इबादत और तिलावत की। मस्जिदों में हजरत इमाम हुसैन के साथ शहीदाने कर्बला पर रोशनी डाली गई।

कोरोना महामारी के बीच रविवार को साप्ताहिक बंदी रही। दूसरा-मुहर्रम पर जुलूस और ताजिये लेकर कर्बला जाने पर भी रोक थी। इस कारण अकीदतमंदों ने घरों में ही मुहर्रम की दसवीं तारीख की रस्मअदायगी की। शिया-सुन्नी सुमदाय के लोगों ने अपने घरों में तख्त सजाए। इमामबाड़ों पर हुई मजलिसों में सीमित लोग शामिल हुए। सीनाजनी और नौहाख्वानी भी की। यह सब सोशल डिस्टेंसिंग के दायरे में हुआ। उलमा के मुताबिक कई वर्षों में ऐसा पहली बार हुआ है जब घरों में ही मुहर्रम मनाया गया।

कर्बला पर नहीं पहुंचे अकीदतमंद
तख्त, ताजिये न उठने के कारण अकीदतमंद कर्बला पर भी नहीं पहुंचे। बाकरगंज में सुन्नी समुदाय का कर्बला शरीफ है, तो स्वालेनगर में शिया समुदाय का कर्बला शरीफ है। दसवीं मुहर्रम को यहां जुलूस की शक्ल में हजारों की भीड़ पहुंचती थी और देर रात तक चिराग रोशन कर दुआएं मांगने का सिलसिला चलता था, जो इस बार थमा दिखा।

शहर से देहात तक तैनात रही पुलिस
मुहर्रम पर जुलूस न निकले। इस पाबंदी पर अमल कराने के लिए जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा। शहर से लेकर देहात सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। अकीदतमंदों ने भी इसका पालन किया और जुलूस निकालने से परहेज किया। शाम को शहर के दोनों कर्बला स्थलों पर भी पुलिसकर्मी तैनात रहे।

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