मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चावल आपूर्ति को लेकर केंद्र पर दोष मढ़ने के लिए बहाने बना रहे: बोम्मई
बेंगलुरु। भाजपा के वरिष्ठ नेता बसवराज बोम्मई ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया चावल आपूर्ति मामले में केंद्र पर दोष मढ़कर ‘तुच्छ बहानेबाजी’ कर रहे हैं और ‘साजिश की राजनीति’ का सहारा ले रहे हैं। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने बुधवार को भाजपा नीत केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह कर्नाटक को ‘अन्न भाग्य’ योजना लागू करने के लिए आवश्यक मात्रा में चावल ना देकर राज्य की कांग्रेस सरकार की चुनावी गारंटी को विफल करने का षड्यंत्र रच रही है।
पूर्व मुख्यमंत्री बोम्मई ने पलटवार करते हुए दावा किया कि राज्य की कांग्रेस सरकार यह समझ गई है कि वह चुनावी ‘गारंटी’ को पूरा करने से चूक जाएगी, जिसके चलते वह ये हथकंडे अपना रही है। उन्होंने राज्य सरकार को सलाह दी कि चावल के लिए आवश्यक प्रबंध नहीं होने तक लाभार्थियों के खातों में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के जरिये पैसा पहुंचाया जाए। भाजपा नेता ने आरोप लगाया, ‘राज्य सरकार एक तरफ गरीबों को 10 किलोग्राम मुफ्त चावल देने के मामले में प्रदेश की जनता को धोखा दे रही है।
वहीं, दूसरी ओर वादा पूरा करने में विफल रहने की बदनामी से खुद को बचाने के लिए राजनीति कर रही है।’ बोम्मई ने यहां पत्रकारों से कहा कि केंद्र खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत हर महीने गरीबों को पांच किलो मुफ्त चावल दे रहा है और दिसंबर से, वे रखरखाव और परिवहन शुल्क भी वहन कर रहे हैं, जो पहले राज्यों द्वारा वहन किया जाता था। उन्होंने कहा, ‘राज्य में कांग्रेस सरकार द्वारा घोषित 10 किलो चावल में से पांच किलो केंद्र द्वारा प्रदान किया जाता है। राज्य सरकार को यह कहकर सच बताना चाहिए कि वे पांच किलो अतिरिक्त चावल देंगे।’
सिद्धारमैया ने केंद्र सरकार पर जरूरतमंदों को लाभ पहुंचाने वाली योजना में रोड़े अटकाने का आरोप लगाते हुए उसे गरीब-विरोधी करार दिया था। उन्होंने कहा था कि कर्नाटक सरकार अन्य स्रोतों और उत्पादक राज्यों से चावल प्राप्त करने के लिए सभी प्रयास कर रही है ताकि वादे के अनुसार समय पर ये जरूरतमंदों को दिए जा सकें।
सिद्धारमैया ने बुधवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा था, केंद्र सरकार ने राजनीतिक फैसला लेते हुए हमें चावल उपलब्ध कराने पर सहमति जताई। उनके भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने चावल उपलब्ध कराने को लेकर सहमति जताई, जिसके आधार पर हमने एक जुलाई से गरीबों को चावल प्रदान करने का वादा किया। कर्नाटक में हमें इतना चावल नहीं मिल सकता ... चावल देने के लिए सहमति जताने के बाद अब वे कह रहे हैं कि वे ऐसा नहीं कर सकते।
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