बरेली: शिकायतों के निस्तारण में डिफाल्टर की श्रेणी में नगर निगम
बरेली, अमृत विचार। सीएम की प्राथमिकता में शामिल आईजीआरएस के मामलों को लेकर जिले के अफसर संजीदा नहीं हैं। जिम्मेदार तय समय में आने वाली शिकायतों का निस्तारण नहीं कर पा रहे हैं। चेतावनी का भी असर नहीं दिख रहा है। लापरवाही पर डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने डीपीओ, पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन, समाज कल्याण अधिकारी समेत सात अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि, जबकि नगर आयुक्त को डीओ लेटर जारी किया है।
आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों को सीएम योगी आदित्यनाथ गंभीरता से लेते हैं। इस पोर्टल पर आने वाले मामलों की वह खुद मॉनीटरिंग करते हैं। इसके बाद भी 15 दिन के अंदर शिकायतों का निस्तारण नहीं होने से मामले डिफाल्टर की श्रेणी में आ जाते हैं।
मई में आईजीआरएस पर आने वाली शिकायतों की डीएम ने समीक्षा की थी, जिसमें नगर निगम के पास 206, समाज कल्याण अधिकारी मीनाक्षी वर्मा के पास 211, जिला प्रोबेशन अधिकारी नीता अहिरवार के पास 64, लोक निर्माण विभाग प्रांतीय खंड के अधिशासी अभियंता नारायण सिंह के पास 13, तहसीलदार नवाबगंज के पास 91, आंवला के पास 28, फरीदपुर के पास 27, बहेड़ी के पास 23 शिकायतें डिफाल्टर की श्रेणी में पाई गईं। यह ऐसे मामले थे, जिनका संबंधित अफसर तय मियाद में निस्तारण नहीं करा पाए। डीएम ने नगर आयुक्त निधि गुप्ता को डीओ लेटर लिखा है। जानकारों की माने तो यह एक तरह व्यवस्था में सुधार लाने के लिए पत्र लिखा जाता है। नगर आयुक्त समकक्ष अफसर होने की वजह से डीएम ने डीओ लेटर जारी किया है, जबकि बाकी सभी को प्रतिकूल प्रविष्टि जारी की गई है।
इस तरह के मामले मिले लंबित
सूत्रों की माने तो नगर निगम के पास सीवर, सड़क, साफ-सफाई, समाज कल्याण विभाग के पास छात्रवृति, जिला प्रोबेशन अधिकारी के पास पेंशन, अधिशासी अभियंता पीडब्ल्यूडी के पास सड़क, तहसीलदारों के पास जमीन के कब्जे, भू-माफिया की शिकायत आदि के मामले लंबित पाए गए हैं।
एसडीएम समेत सभी अफसरों को लंबित मामलों का जल्द से जल्द निस्तारण के आदेश दिए गए हैं। शिकायतकर्ता निस्तारण से संतुष्ट हैं, इसके लिए फीडबैक भी लेने को कहा गया है।-ऋतु पूनिया, एडीएम प्रशासन
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