बरेली: ...तो गरीब इस साल भूल जाएं गेहूं खाने का सपना
बरेली, अमृत विचार। पेट भरने के लिए सरकारी राशन के भरोसे रहने वाले जिले के सात लाख गरीबों को इस बार शायद खाने को गेहूं की रोटी न मिल पाए। गेहूं के सरकारी गोदाम पहले से खाली पड़े हैं और इस बार समर्थन मूल्य पर खरीद भी न के बराबर हो पाई है। खुद सरकारी अधिकारी अंदेशा जता रहे हैं कि राशन कार्ड पर इस बार गेहूं के विकल्प के तौर पर दूसरा अनाज मिल पाएगा। उनके राशन में फोर्टिफाइड चावल की मात्रा भी बढ़ सकती है।
पिछले महीनों में सरकारी गोदामों में मौजूद काफी गेहूं का निर्यात किया जा चुका है। ऊपर से इस बार गेहूं की सरकारी खरीद भी लक्ष्य के मुकाबले एक प्रतिशत से थोड़ी ही ज्यादा हुई है। अफसरों का दावा है कि खरीद बढ़ाने के लिए इस बार मोबाइल क्रय केंद्रों की व्यवस्था की गई थी लेकिन किसानों ने फिर भी अपना गेहूं सरकार को नहीं बेचा। शुक्रवार को गेहूं खरीद खत्म हो रही है। गेहूं का पुराना सरकारी स्टॉक भी खत्म हो चुका है।
इससे गरीबों को दिए जाने वाले मुफ्त राशन से गेहूं गायब होने की संभावना जताई जा रही है। बता दें कि जिले में सात लाख से ज्यादा राशन कार्ड धारक हैं जिन्हें 1794 कोटे की दुकानों से हर महीने 6,553 मीट्रिक टन गेहूं दिया जाता है। जिले में 2022-23 गेहूं खरीद के लिए 135 क्रय केंद्र बनाए गए थे जिन पर 1.80 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य था। समर्थन मूल्य के मुकाबले बाजार में गेहूं का भाव ज्यादा होने के कारण इन केंद्रों पर किसान नहीं पहुंचे। सिर्फ 444 किसानों ने 2465.51 मीट्रिक टन गेहूं सरकारी केंद्रों पर बेचा जो लक्ष्य का सिर्फ 1.36 प्रतिशत है। बता दें कि समर्थन मूल्य पर सरकार की ओर से खरीदा जाने वाला गेहूं ही गरीबों को राशन में दिया जाता है। स्टॉक खाली होने के बाद अब राशन कार्ड पर गेहूं देने के लिए एक ही विकल्प दूसरे राज्यों से गेहूं खरीदने का रह गया है।
उत्तराखंड की फैक्टरियों को खूब बेचा गेहूं
विभागीय अफसर बताते हैं कि उत्तराखंड में कई बिस्कुट फैक्टरियां हैं जहां किसानों को गेहूं का अच्छा रेट मिला। उत्तराखंड से सटे बहेड़ी और रामपुर से सटे मीरगंज के ज्यादातर किसानों ने समर्थन मूल्य से दो सौ रुपये ज्यादा रेट पर गेहूं इन फैक्टरियों को बेच दिया। फैक्टरी वालों ने गेहूं खरीद के लिए अपने एजेंट लगा रखे थे जो लगातार किसानों-व्यापारियों से संपर्क करते रहे।
किसानों की सुने
बाजार में हमारा गेहूं दो सौ रुपये ज्यादा रेट पर बिका। सरकारी केंद्रों पर भुगतान भी तुरंत नहीं मिलता। बाजार में बेचने से हाथ के हाथ भुगतान मिल गया। -हरि प्रकाश गंगवार, गांव बसई शेरगढ़
सरकारी केंद्र पर गेहूं बेचना आसान नहीं है। तौल बमुश्किल होती है, फिर भुगतान के लिए इंतजार करना पड़ता है। इस बार बाजार में अच्छा रेट मिला। -बबलू गंगवार सहोड़ा गांव
दो सालों में गर्त में पहुंच गई गेहूं खरीद
2019-20 1.59 एमटी 94321.49 एमटी
2020-21 1.61 एमटी 109135.26 एमटी
2021-22 लक्ष्य नहीं 169477.57 एमटी
2022-23 1.80 एमटी 2465.51 एमटी
2023-24 1.80 एमटी 3175.5 एमटी
पिछले साल के बाद इस साल खरीद प्रतिशत काफी कम रहा है। गोदाम भी खाली पड़े हैं। बाजार में गेहूं का मूल्य ज्यादा था। मोबाइल केंद्रों की व्यवस्था के साथ लेखपालों को लगाने के बाद भी किसान क्रय केंद्रों पर नहीं पहुंचे। -कमलेश पांडेय, जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी
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