शाहजहांपुर: सरे बाजार हत्या करने के मामले में दो सगे भाइयों को उम्रकैद

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Edited By Amrit Vichar
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बस स्टैंड के निकट रेलवे क्रासिंग के पास वर्ष 1997 में कर दी गई हत्या

शाहजहांपुर, अमृत विचार। वर्ष 1997 में शाहजहांपुर के सदर बाजार थाना क्षेत्र में बीच बाजार में गोली मारकर हत्या कर देने के मामले में 26 साल बाद फैसला आया है। जिसमें दोष सिद्ध होने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दशम् पंकज कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा और दो लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। मुकदमा चलने के दौरान एक आरोपी की 25 अगस्त 2021 को मृत्यु हो गई।

थाना सदर बाजार क्षेत्र के मोहल्ला बाडूजई प्रथम निवासी उषा जौहरी ने 30 जुलाई 1997 को थाना सदर बाजार में प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया कि मेरे मकान पर थाना सेहरामऊ दक्षिणी क्षेत्र के गांव बादशाहनगर निवासी अखंड प्रताप सिंह पुत्र रामचंद्र सिंह व रामचंद्र सिंह पुत्र पूरन सिंह ने जबरन कब्जा कर लिया था, जिसका दीवानी मुकदमा अदालत में चल रहा था। 

ऊषा जौहरी के मुताबिक इसी दौरान कुछ लोगों ने बीच में पड़ कर मुझे मकान पर कब्जा दिला दिया था। इसी कारण अखंड प्रताप और उसका पिता रामचंद्र मेरे पति श्याम प्रकाश जौहरी से रंजिश मानने लगे थे। 30 जुलाई 1997 को शाम 6:15 बजे जब मैं अपने पति श्याम प्रकाश जौहरी व पुत्री ज्योति के साथ चप्पल टकाने व खरीददारी करने बस अड्डे की तरफ से लाइन पार कर गोयल की दुकान पर जा रही थी। जैसे ही हम लोग रेलवे क्रॉसिंग के बीच में पहुंचे, तभी पीछे से अखंड प्रताप ने पति को गाली देते हुए आवाज दी, जैसे ही पति ने पलट कर पीछे देखा, कि तभी एकदम से रामचंद्र प्रताप और अखंड प्रताप सिंह ने अपने- अपने हाथों में लिए तमंचे से मेरे के ऊपर फायर कर दिया। 

फायर लगने के बाद पति और मैं  व बेटी ज्योति गोयल की दुकान की तरफ भागे। कि अखंड प्रताप और रामचंद्र के साथ खड़े केके सिंह पुत्र रामचंद्र ने पीछे से एक फायर किया, जो पति के लगा, जिससे पति गोयल की दुकान के बाहर पड़े तख्त पर गिर पड़े। फायर की आवाज सुनकर लोगों में भगदड़ मच गई। दुकानदार भी अपनी दुकानों में छिप गए थे और आतंक फैल गया था। गोली लगने से पति की मौत हो गई। 

पीड़िता की तहरीर पर पुलिस ने दो सगे भाइयों अखंड प्रताप सिंह, केके सिंह और पिता रामचंद्र के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर विवेचना के उपरांत तीनों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में प्रस्तुत किया गया। जहां सरकारी वकील श्रीपाल वर्मा और बचाव पक्ष के वकील के तर्को व गवाहो के बयानों का सुनने के बाद पत्रावली का अवलोकन कर दोष सिद्ध होने पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश दशम् पंकज कुमार श्रीवास्तव की कोर्ट ने दो सगे भाइयों को आजीवन कारावास की सजा और दो लाख रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है। वहीं मुकदमा चलने के दौरान एक आरोपी रामचंद्र की 25 अगस्त 2021 को मृत्यु हो गई।

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