लापरवाही : रामपथ पर टूटी पाइप लाइन से रोजाना 2 लाख लीटर बर्बाद हो रहा पानी
95 दिनों में तकरीबन 150 जगह टूटी पाइप लाइन, व्यर्थ बह गया 200 लाख लीटर पानी
अयोध्या, अमृत विचार। एक ओर सरकार जल संरक्षण को लेकर तमाम कवायदें कर रही है वहीं निर्माणाधीन रामपथ पर बीते तीन महीने में 200 लाख लीटर पानी बह कर बर्बाद हो गया। निर्माण कार्य के चलते टूट रही पाइप लाइनों से रोजाना करीब डेढ़ से दो लाख लीटर पानी बिना इस्तेमाल के बह जा रहा है। संकट सिर्फ इतना ही नहीं है बल्कि पानी की इस बर्बादी के चलते नगर निगम को राजस्व की भी भारी क्षति झेलनी पड़ रही है। जलापूर्ति संकट के कारण निगम जलकल कर की वसूली नहीं कर पा रहा है।
सहादतगंज से अयोध्या नयाघाट तक रामपथ नाम से हो रहे सड़क चौड़ीकरण के चलते 13 किलोमीटर के दायरे में आने वाली करीब 60 हजार से अधिक की आबादी जलापूर्ति और बिजली के संकट से बीते बीते 95 दिनों से लगातार जूझ रही है। तमाम कोशिशों के बाद भी इस गहराती समस्या का समाधान प्रशासन की ओर से नहीं तलाशा जा सका है। स्थिति इतनी भयावह हो गई है इस संकट की चपेट में आई आबादी त्राहि-त्राहि को मजबूर है।
निर्माणाधीन रामपथ के दायरे में सहादतगंज से लेकर अयोध्या के नयाघाट तक 50 से अधिक मोहल्लों और 12 कालोनियां आतीं हैं। कुल 77 नलकूपों द्वारा इस क्षेत्र को जलापूर्ति होती है। नगर निगम की ओर से स्थापित इन नलकूपों में अक्सर 40 से अधिक नलकूप बंद रहते हैं। ऐसे में तीन महीने से इन इलाकों की आबादी अभूतपूर्व जलापूर्ति संकट झेल रही है। खुद जलकल विभाग के अधिकारियों का कहना है कि समस्या का निदान होने के बजाए संकट बढ़ता जा रहा है। बताया कि इन 77 नलकूपों के लिए तैनात 120 नलकूप आपरेटरों में 75 से अधिक खाली बैठने के लिए मजबूर हैं। लगातार 22 नलकूपों के बंद होने के कारण रखरखाव और मोटरें प्रभावित हो रही हैं। अनुरक्षण भी चार महीने से नहीं हो सका है ऐसे में इन नलकूपों को चलाए जाने से पहले उनकी मरम्मत की दरकार अलग होगी।
जलकल के सुपरवाइजर अश्विनी कुमार ने बुधवार को बताया हर दिन टूट रही पाइप लाइनों के कारण रोजाना डेढ़ से दो लाख लीटर पानी बर्बाद होकर खोदे गए नालों में बह जा रहा है। उन्होंने बताया कि तीन महीने से जारी केसंकट के कारण करीब 200 लाख लीटर पानी बर्बाद हो गया है। हालांकि उन्होंने कहा कि यह एक अनुमानित आंकड़े हैं। सुपर वाइजर के अनुसार 95 दिनों में 150 से ज्यादा स्थानों पर पाइप लाइन के टूटने और 60 जगह वाल्वों के खराब होने के मामले सामने आए हैं।
करीब 184 दिनों तक संकट से नहीं उबरेंगे रामपथ के लोग
सरकार द्वारा दिसम्बर तक रामपथ निर्माण की डेडलाइन मानी जाए तो करीब 184 दिनों तक निर्माणाधीन रामपथ पर जलापूर्ति और बिजली का संकट बरकरार रहेगा। जुलाई के 31, अगस्त के 31, सितम्बर के 31, नवम्बर के 30 और दिसम्बर के 31 दिनों को मिला कर कुल 184 दिन हैं। हालांकि दिसम्बर तक भी पूरी तरह से निर्माण पूरा होगा इसे लेकर भी फिलहाल संशय है। जिस तरह से निर्माण की रफ्तार है उससे दिसम्बर तक तो पूरी तरह निर्माण मुमकिन नहीं दिख रहा है। निर्माण एजेंसी आर एंड सी के इंजीनियर प्रदीप शुक्ल खुद संशय में हैं। उनका कहना है कि सीवर लाइन और डक्ट में काम के बाद भी सड़क निर्माण लायक स्थिति बननी मुश्किल है। बता दें कि जुलाई से सितम्बर तक एजेंसी में कार्यरत अधिकतर मजदूर अपने घर चले जायेगें। जिसके कारण निर्माण के लिए आधे से कम मजदूर रह जायेगें।
एजेंसी की लापरवाही से नगर निगम की जलकर वसूली भी प्रभावित
रामपथ का निर्माण कर रही एजेंसी की लापरवाही से नगर निगम को भी राजस्व की क्षति उठानी पड़ रही है। बताया जाता है कि जलकल कर की वसूली प्रभावित हो रही है। बीते तीन महीने से प्रभावित क्षेत्रों में जलकर के बिल नहीं जा रहे हैं। जलकल के अधिशासी अभियन्ता अनूप सिंह का कहना है कि पूरी सप्लाई के बाद ही बिल इश्यू होते हैं लेकिन नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि अमूमन 3 से चार लाख रुपये के गृहकर का बिल जारी किया जाता है। उन्होंने बताया कि अभी यह दिक्कत बरकरार रहेगी।
प्रभावित क्षेत्र
सिविल लाइन, रिकाबगंज, नियांवा, साहबगंज, अमानीगंज, हैदरगंज, खवासपुरा, पुरानी सब्जी मंडी, मुकेरी टोला, रीडगंज, गुदड़ीबाजार, राठहवेली, अंगूरीबाग, नहरबाग, तेलीटोला, शास्त्रीनगर कालोनी, अमानीगंज आवास विकास कालोनी आदि।
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