हल्द्वानी: हिंदी बदलते समाज की संवाद की भाषा है और रहेगी, आज मिली है वैश्विक पहचान - मेहेर

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हल्द्वानी, अमृत विचार। हिन्दी के पक्ष में तमाम तर्कों के बावजूद यह एक कटु सत्य यह भी है कि देश में तकनीकी और आर्थिक समृद्धि के साथ-साथ अंग्रेजी ने पूरे देश को अपने वश में कर लिया है। हिन्दी, देश की राजभाषा होने के बावजूद देशभर में अंग्रेजी का वर्चस्व कायम है। यह बात भारत सरकार के गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के उप निदेशक डा. छबील कुमार मेहेर ने कही।
 

मेहेर यहां यूनाइटेड इण्डिया इश्योरेंस कम्पनी लिमिटेड के कार्यालय के निरीक्षण को पहुंचे थे। इस दरान उन्होंने कार्यालय में राजभाषा के प्रयोग का जायजा लिया। उन्होंने कार्यालय में राजभाषा अधिनियम के अन्तर्गत संवैधानिक प्रावधानों के अनुपालन हेतु विस्तृत जांच की और कार्मिकों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि हिन्दी जानते हुए भी ज्यादातर लोग हिन्दी में बोलने, पढ़ने या काम करने में हिचकिचाते हैं। मगर अब गूगल और भारत से बाहर मॉरीशस, फिजी, सूरीनाम, गुयाना, त्रिनिदाद में हिंदी का प्रचलन बढ़ा है। वहां बड़ी संख्या में लोग हिंदी बोलते हैं, वैश्विक स्तर पर हिंदी को बढ़ावा मिला है।
कहा कि हिन्दी के प्रचार-प्रसार के लिए लगातार कोशिश हो रही है। आम जनता और युवाओं को इससे जोड़ने के लिए अभिनव और रचनात्मक प्रयास किए जा रहे हैं। इस मौके पर उनके साथ कम्पनी के क्षेत्रीय कार्यालय देहरादून से क्षेत्रीय प्रबन्धक अशोक भाष्कर पाण्डेय एवं राजभाषा अधिकारी अंजू बाला भी मौजूद रहे।

उन्होंने भी  कार्मिकों को कार्यालयी कार्यों तथा विशेष रूप से बीमा क्षेत्र के ग्राहकों से जुड़े कार्यों में अधिकाधिक हिन्दी भाषा का प्रयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कम्पनी के सभी प्रपत्र, साइन बोर्ड तथा मैनुअल आदि द्विभाषी रूप में प्रयोग में लाये जाएं। इस मौके पर देवेंद्र कुमार चौधरी,राजेंद्र गोस्वामी,हरीश मेहता सहित तमाम लोग मौजूद रहे।

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