चीन को जवाब
अपनी विस्तारवादी नीतियों के लिए जाना जाने वाला चीन भारतीय सीमा पर अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर उसने 29-30 अगस्त की रात को घुसपैठ का दुस्साहस कर यह साबित कर दिया है। हालांकि भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों …
अपनी विस्तारवादी नीतियों के लिए जाना जाने वाला चीन भारतीय सीमा पर अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। एक बार फिर वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर उसने 29-30 अगस्त की रात को घुसपैठ का दुस्साहस कर यह साबित कर दिया है। हालांकि भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों की इस कोशिश को नाकाम कर दिया है।
गत 15 जून को भी चीनी सैनिकों ने गलवान घाटी में ऐसा ही कुछ किया था जिसमें हमारे 20 जवीन शहीद हो गए थे। उसके बाद वार्ता में शांति बहाली और सीमा पर अतिक्रमण नहीं करने पर सहमति बनी। यह वार्ता अब भी जारी है, मगर इससे इतर चीनी सैनिकों ने यथास्थिति में बदलाव की कोशिश करते हुए क्षेत्र में तनाव बढ़ाने और भरोसा तोड़ने वाली हरकत की।
धोखेबाजी चीन की फितरत में रही है और वह अब तक ऐसा कई बार करता आया है, मगर उसे इस बात का ध्यान रखना होगा कि भारत अब 2020 वाला भारत है जिसकी सैन्य क्षमता और इरादे चीन को सबक सिखाने के लिए तैयार हैं। यही वजह रही है कि इस बार भारतीय सैनिकों ने घुसपैठ कर रहे चीनी सैनिकों को न केवल रोका बल्कि उन्हें जबरन पीछे भी धकेला है।
भारतीय सैनिकों ने पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर उंचाई वाले इलाके को अपने नियंत्रण में ले लिया है। इससे हमारी सेना के आक्रामक रवैये का अंदाजा लगता है। छल-कपट के लिए जाना जाने वाला चीन हमेशा ही ऐसी हरकत करता आया है जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा ही है।
इस बात की आशंका विदेश मंत्री एस जयशंकर पहले जता चुके थे जब उन्होंने अपने बयान में कहा था कि ‘लद्दाख की स्थिति 1962 के संघर्ष के बाद सबसे गंभीर है’। मगर सीमा पर हमारी अभूतपूर्व सेना की उपस्थिति के बीच चीन अपने इरादों में कामयाब नहीं हो पाया है। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग इन दिनों अपने देश में ही विरोध के स्वरों का सामना कर रहे हैं। तिब्बत को लेकर भी वह सतर्क और परेशान हैं। अपने देश में ही समर्थन खोते देख जिनपिंग क्या अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर इस प्रकार की हरकत करवाकर अपने देश के लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं?
वैसे भी कोरोना को लेकर जिनपिंग की अंतर्राष्ट्रीय बिरादरी और खुद अपने देश में भी तीखी आलोचना हुई है। आलम यह है कि चीनी अधिकारी ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं जो सरकार या उसकी नीतियों के खिलाफ कुछ भी बोल रहे हैं। आजीवन राष्ट्रपति बने रहने के इरादों वाले जिनपिंग अपने खोते हुए आधार को सेना के दम पर हासिल करना चाहते हैं, तो यह उनकी गलतफहमी है। जिनपिंग के इरादे चाहे कुछ भी हों, मगर इतना साफ है कि भारतीय सेना चीन की हर हरकत का जवाब देने के लिए अब पूरी तरह तैयार है।
