Bakrid 2023 : Fatehpur में कुर्बानी के त्यौहार में बकरीद की नमाज अदा करने को इबादतगाहों में दिखा हुजूम
फतेहपुर में मुल्क की तरक्की व सौहार्द को उठे हाथ।
फतेहपुर में मुल्क की तरक्की व सौहार्द को हाथ उठे। कुर्बानी के त्यौहार में बकरीद की नमाज अदा करने को इबादतगाहों में हुजूम दिखा।
फतेहपुर, अमृत विचार। ईद उल अजहा का त्यौहार गुरुवार को मनाया गया। इबादतगाहों में बकरीद की नमाज अदा करने को हुजूम उमड़ पड़ा। मुल्क की तरक्की व सौहार्द बरकरार रखने की दुआएं मांगी गईं। बच्चों ने नमाज अताकर अल्लाहताला को याद किया गया। ईदगाह में नमाजियों के बीच राजनैतिक दलों के नेताओं के साथ प्रशासनिक अफसर पहुंचे और गले लगकर कुर्बानी के त्यौहार की बधाई दी।
सुबह नौ बजे ईदगाह में शहर काजी सईदुल इस्लाम अब्दुल्ला ने नमाज पढ़ाई। बताया कि बकरीद, हजरत इब्राहिम के अल्लाह के प्रति अपने बेटे इस्माइल की कुर्बानी की याद में मनाई जाती है। हजरत इब्राहिम अल्लाह में सबसे ज्यादा विश्वास करते थे। अल्लाह पर विश्वास दिखाने के लिए उन्हें बेटे इस्माइल की बलि देनी थी। उन्होंने जैसे की तलवार उठाई।
दैवीय शक्ति से उनके बेटे के बजाय एक दुंबा (भेड़ जैसी प्रजाति का पशु) कुर्बानी को आ गया। दरअसल इब्राहीम से जो असल कुर्बानी मांगी गई थी। वह थी उनकी खुद की। मतलब यह है कि खुद को भूल जाओ। अपने सुख-आराम को भूलकर खुद को मानवता की सेवा में पूरी तरह लगा दो। उन्होनें अपने पुत्र इस्माइल और उनकी मां हाजरा को मक्का में बसाने का निर्णय लिया। मक्का उस समय रेगिस्तान के सिवा कुछ नहीं था। उन्हें मक्का में बसाकर वह खुद मानव सेवा के लिए निकल गए। इस तरह एक रेगिस्तान में बसना उनकी और उनके पूरे परिवार की कुर्बानी थी।
शहर काजी को भेंट की बुके
बकरीद की नमाज के बाद मुबारकबाद का दौर चला। शहर काजी सईदुल इस्लाम अब्दुल्ला को सदर विधायक चंद्र्र प्रकाश लोधी व नगर पालिका अध्यक्ष राज कुमार मौर्या ने बुके भेंट की। बधाई देने वालों में बार एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष जगदीश सिंह उर्फ जालिम सिंह भी मौजूद रहे।
सच बचाने को शरारती तत्वों से बचना हेागा
काजी ए शहर कारी फरीदउद्द्दीन कादरी ने मोहल्ला पनी की जामा मस्जिद बन्दगी मियां में नमाज पढ़ाई। उन्होंने कहा कि हम सब को मिलाकर राष्ट्र का वजूद है। इस मुल्क में विभिन्न जाति धर्म आस्था के लोग निवास करते हैं। इसके बाद भी यह अखण्ड भारत है। हमारे प्यारे हिन्दुस्तान में हर धर्म के लोगों को अपने धर्म शिक्षा तथा अपनी उन्नति के लिए काम करने की संवैधानिक आजादी है। उन्होंने लोगों को संकल्प दिलाया कि जिस तरह पैगंबर इब्राहीम पैगंबर इस्माईल व माँ हाजरा ने शैतान की बात ना मानकर राहे हक में अल्लाह की खुशी के लिए जानी-माली कुर्बानी पेश की। उसी तरह हमे भी चाहिए कि सच को बचाने के लिए असमाजिक शरारती तत्वों के बहकाने में नहीं आना है। हम सभी को चाहिए कि जनपद, राज्य व देश ही नहीं बल्कि विश्व बन्धुत्व व भाइचारे की कोशिश करनी चाहिए। बकरीद की नमाज में कादरी ने देश की सुरक्षा समृति तथा भाई चारा कायम रखने की दुआ की। इसके अलावा पुलिस व प्रशासन और नगर पालिका को उनके इन्तजाम पर शुक्रिया अदा किया।
गले लगकर खरीदे खिलौने
ईदगाह में नमाज अदा करने को बच्चे भी अच्छी संख्या में नजर आए। अकीदत के साथ नमाज पूरी करके एक दूसरे से गले लगे और फिर सजी दुकानों पर अपनी ख्वाहिशें पूरी करनी शुरू कर दी। आबूनगर के राशिद ने डोरीमन खरीदा तो मसवानी के साहिल ने बंदूक पंसद की।
तीन हिस्सा में एक गरीबों को निकाला
ईद उल अजहा पर तीन दिन तक कुर्बानी का सिलसिला चलता है। गुरुवार को पहले दिन बकरीद की नमाज के बाद कुर्बानी दी गई। इस कुर्बानी के गोश्त को तीन हिस्सों में बांटा गया। एक हिस्सा खुद के लिए निकाला गया। दूसरा हिस्सा रिश्तेदार का जबकि तीसरा हिस्सा गरीब के लिए अलग किया गया।
