हल्द्वानी: लीकेज रोकने को लाखों रुपये खर्च, फिर भी बर्बाद हो रहा पानी
शहर की प्रमुख पेयजल लाइनें हैं 40 साल से अधिक पुरानी
जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार लाइन का औसत जीवनकाल होता है 30 साल एक छोटी लीकेज लगभग 3 हजार रुपये, बड़ी पर 10 हजार रुपये खर्च, एक माह में औसतन 30 हजार रुपये खर्च
हल्द्वानी, अमृत विचार। प्रत्येक साल लीकेज से हजारों लीटर पानी बर्बाद होता है। जल संस्थान के अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक साल लीकेज पर लाखों रुपये खर्च किए जाते हैं। अधिकारियों की मानें तो शहर की सभी प्रमुख लाइनें 40 साल से अधिक पुरानी सीमेंट की लाइनें हैं। इन लाइनों की हालत बहुत खराब है।
विभाग के अधिकारियों का कहना है कि एक लाइन का औसत जीवनकाल लगभग 30 साल होता है। लेकिन शहरवासी पानी के लिए 40 साल पुरानी लाइनों पर निर्भर हैं। लोहे के पाइपलाइन की औसत जीवनकाल लगभग 20 साल होता है। लीकेज के कारण प्रतिदिन 15 प्रतिशत पानी बर्बाद होता है।
जल संस्थान टीपीनगर केंद्र के सहायक अभियंता प्रमोद पांडे ने बताया कि रामपुर रोड में सड़क चौड़ीकरण में पेड़ों की कटाई के कारण कई दिनों तक जगह जगह लाइन लीकेज हुई। प्रमोद पांडे ने बताया कि सोमवार को देवलचौड़ में लीकेज ठीक की गई। बीते दिनों बरेली रोड में होंडा शोरूम के पास, गुरूद्वारा के पास की लाइनों में लीकेज ठीक की गई।
शीशमहल केंद्र के सहायक अभियंता नीरज तिवारी ने बताया कि छोटी लीकेज होने पर विभागीय कर्मचारी लाइन ठीक करते हैं जिसमें कोई अतिरिक्त पैसा खर्च नहीं होता है। लेकिन गहराई में लाइन होने पर मशीन की मदद लेनी पड़ती है और वेल्डिंग कार्य होने पर लगभग 10 हजार रुपये तक खर्च हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को नैनीताल रोड में पंजाब नेशनल बैंक के पास लीकेज ठीक किया गया।
इससे पहले काठगोदाम के द्यूरा, बीयरशिवा स्कूल के पास, खंडेलवाल पार्क, जजी के पास तथा एलआइसी के पास लीकेज ठीक किए। बताया कि इस साल अभी तक लगभग 35 लीकेज बना दिए हैं। ट्रांसपोर्टेशन ज्यादा है और सड़क के बीचोंबीच लाइन है जिस कारण लीकेज ज्यादा है और 40 साल से अधिक पुरानी सीमेंट की लाइन है। नैनीताल रोड सबसे प्रमुख मार्ग होने से ट्रैफिक भी सबसे ज्यादा होता है जिससे लीकेज ठीक करने में भी दिक्कत आती है।
विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रत्येक साल एक सहायक अभियंता के अंतर्गत आने वाले क्षेत्र में औसतन 3 लाख रुपये लीकेज ठीक करने में लग जाता है। इस प्रकार हल्द्वानी डिवीजन के साथ टीपीनगर, ऊंचापुल, कुसुमखेड़ा काठगोदाम सहित 5 केंद्र हैं। इस औसत से देखा जाए तो लगभग 15 लाख रुपये केवल लीकेज ठीक करने में लग जाता है।
ऊंचापुल केंद्र के सहायक अभियंता पंकज उपाध्याय ने बताया कि सोमवार को लोहरियासाल मल्ला गली नं. 6 में लीकेज कार्य ठीक किया गया। उन्होंने बताया कि बिठौरिया क्षेत्र में प्रत्येक साल लीकेज ठीक किया जाता है। अब नहर कवरिंग होने के बाद इससे निजात मिली है।
बताया कि बीते दिनों पीपलपोखरा और फतेहपुर में लीकेज ठीक किया गया। छोटी लीकेज विभाग के कर्मचारियों के द्वारा ही ठीक कर ली जाती है। इसी तरह अन्य कई क्षेत्रों में लीकेज की समस्या होती है जिसे समय - समय पर ठीक किया जाता है। उन्होंने बताया कि महीने में लगभग 10 लीकेज ठीक किए जाते हैं।
