Kanpur Suicide: कॉलेज में सहयोग न मिलने से गोल्ड मेडलिस्ट प्रधानाचार्य ने दी जान, परिजन बोले- परेशान किया जा रहा था

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कानपुर में कॉलेज में सहयोग न मिलने से गोल्ड मेडलिस्ट प्रधानाचार्य ने दी जान।

कानपुर में कॉलेज में सहयोग न मिलने से गोल्ड मेडलिस्ट प्रधानाचार्य ने जान दे दी। घटना से परिजनों में कोहराम मच गया। सूचना पाकर पहुंची पुलिस जांच में जुटी।

कानपुर, अमृत विचार। कॉलेज में चार्ज संभालने के बाद से साजिशों से घिरे गोल्ड मेडलिस्ट प्रधानाचार्य ने आखिर फांसी लगाकर जान दे दी। उन्हें इस तरह घेरा गया कि आहत होकर आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर हो गए। सुबह बाथरूम में शव लटका मिला तो कोहराम मच गया। पुलिस और फोरेंसिक टीम ने आत्महत्या के पहलुओं पर साक्ष्य एकत्र किए हैं। पुलिस का कहना है कि परिजनों की ओर से तहरीर मिलने पर आगे की जांच कर कार्रवाई की जाएगी।  

मूलरूप से पश्चिम बंगाल के नूलनवाड़ी के रहने वाले 57 वर्षीय सुकांत सरकार परिवार के साथ कल्याणपुर के आनंदशील अपार्टमेंट के फ्लैट नंबर 401 में रहते थे। सुकांत की नवंबर 2022 में आयोग की ओर से शिवराजपुर बैरी के राम सहाय इंटर कॉलेज में बतौर प्रधानाचार्य नियुक्त हुई थी। उनके छोटे भाई सुदीप्तो सरकार ने पुलिस को बताया कि कॉलेज में उस समय प्रधानाचार्य का पद खाली थी। प्रबंध तंत्र ने कॉलेज की एक प्राध्यापक को कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाया था। सुकांत की नियुक्ति होने के बाद कार्यवाहक प्रधानाचार्य के सभी अधिकार छिन गए थे।  

कॉलेज में सुकांत सरकार की नियुक्ति होने के बाद से ही सियासत करने वाले शिक्षकों ने सहयोग करना बंद कर दिया था। इस बात को लेकर वह काफी परेशान थे और मानसिक तनाव से जूझ रहे थे। इसी कारण उन्होंने तीन जुलाई से कॉलेज जाना बंद कर दिया था। आखिर शुक्रवार को तड़के उन्होंने बाथरूम में दुपट्टे से फांसी लगाकर जान दे दी। सुबह जब पत्नी जया सरकार को वह कमरे में नहीं दिखे तो उन्हें आवाज लगाई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। उन्होंने बाथरूम में जाकर देखा तो वहां फांसी पर लटका देख उनके होश उड़ गए। 

परिजनों ने अन्य लोगों की मदद से फंदा काटकर किसी तरह डॉक्टर के पास पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। सूचना पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक ने जांच कर साक्ष्य एकत्र किए। प्रधानाचार्य सुकांत सरकार के दो बेटे हैं। इनमें बड़े बेटे सुजाय की बेंगलुरु में 10 दिन पहले ही आईटी सेक्टर में नौकरी लगी है। छोटा बेटा सुजल इंटर का छात्र है। भाई ने बताया कि सुकांत सरकार ने वर्ष 1992-93 में एमफिल से गोल्ड मेडल हासिल किया था। इस प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच के लिए मुख्यमंत्री पोर्टल से लेकर माध्यमिक शिक्षा आयोग तक शिकायत करने की बात कही है।

उन्हें हटाने की रची जा रही थीं साजिशें

पत्नी जया सरकार ने बताया कि वह हंसमुख स्वभाव के थे। रोते हुए व्यक्ति को भी हंसा देते थे। छात्रों और पढ़ाई से उन्हें बहुत ज्यादा लगाव था, लेकिन राम सहाय इंटर कॉलेज में 12 नवंबर 2022 को चार्ज संभालने के बाद कार्यवाहक प्रधानाचार्या रही शिक्षिका ने उनके खिलाफ कोर्ट से लेकर डीआईओएस ऑफिस तक तमाम शिकायतें कीं। इसमें स्थानीय शिक्षक नेता भी उन्हें पद से हटाने के लिए शिक्षिका का साथ दे रहे थे। इन्हीं सब चीजों को लेकर वह मानसिक तनाव में रहते थे। अक्सर कहते थे कि यहां अच्छा नहीं लग रहा है। वह असम के नवोदय विद्यालय लौटने की बात कहते थे, जहां पहले रह चुके थे। उनके 82 वर्षीय पिता पनकी में रहते हैं। वह बड़ी उम्मीदों के साथ कानपुर आए थे, लेकिन यहां शिक्षकों की राजनीति का शिकार हो गए। 

शिकायत कर पांच महीने तक वेतन रुकवाया गया

आत्महत्या की सूचना पर शिक्षक शैलेंद्र द्विवेदी, अनुराग कटियार, अमित कटियार समेत दर्जनों शिक्षक पहुंचे। इन्होंने भी कहा कि एक शिक्षक नेता की झूठी शिकायतों के चलते एक अच्छा प्रधानाचार्य आत्महत्या करने को मजबूर हो गया। इतनी शिकायतें की गई हैं कि डीआईओएस दफ्तर में पूरी फाइल तैयार हो गई है। 12 नवंबर को चार्ज संभालने के बाद से मार्च तक उनका वेतन रुकवाए रखा गया। आयोग से नियुक्ति होने के बाद उनके साथ साजिश की गई थी। सुकांत सरकार के आत्महत्या की जानकारी जैसे ही शिक्षकों को हुई, वह कामकाज छोड़कर पोस्टमार्टम हाउस पहुंच गए। एक सुर में सभी लोग सुकांत सरकार की तारीफ ही करते नजर आए। 

छेड़खानी में फंसाने की दी गई थी धमकी 

परिजनों ने दबी जुबान बताया कि कॉलेज की कार्यवाहक प्रधानाचार्या रही शिक्षिका ने उन्हें छेड़खानी में फंसाने की धमकी दी थी। इस बात से वह काफी परेशान रहने लगे थे। पत्नी जया ने बताया कि उनके पति शिक्षाविद् होने के साथ वाणिज्य के बेहतरीन शिक्षक थे। छह महीने पहले आयोग से यहां नियुक्ति होने और चार्ज संभालने के बाद शिक्षक नेताओं के गिरोह ने इतनी शिकायतें की कि कोर्ट-कचहरी के चक्कर लगाते-लगाते जिंदगी से हार गए। इसके पहले वह मिर्जापुर, गाजियाबाद समेत कई जगहों पर कार्यरत रहे हैं। 

विलंब से आने पर लगवा देते थे गैरहाजिरी

सुकांत सरकार ने चार्ज संभालने के बाद कॉलेज में शिक्षा का माहौल तैयार करने के लिए कई सख्त कदम उठाए थे। अगर कोई शिक्षक विलंब से आता था तो उसकी गैरहाजिरी लगवा देते थे। हालांकि हिदायत देकर दोपहर में रजिस्टर में हस्ताक्षर करा देते थे। बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देते थे। बच्चों को लुभाने के लिए बीच-बीच में गुनगुना कर टॉफी भी बांटते थे।

21 मई को मनाई थी 25वीं सालगिरह

परिजनों ने बताया कि 21 मई को उनकी शादी की 25वीं सालगिरह थी। वह काफी खुश मिजाज थे, लेकिन कॉलेज की सियासत ने उनकी जिंदगी में जहर घोल दिया था और उन्हें जिंदगी बोझिल सी लगने लगी थी। 

परिवार की ओर से अभी तहरीर नहीं मिली है। तहरीर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कर मामले की जांच की जाएगी और आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।- धनंजय पांडेय, थाना प्रभारी कल्याणपुर

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