कहने को तो हरदोई मेडिकल कॉलेज, लेकिन व्यवस्था सीएचसी से भी बद्तर, टार्च की रोशनी में हो रहा मरीज का इलाज
हरदोई। नाम हरदोई मेडिकल कालेज, लेकिन काम सीएचसी से भी बद्तर तरीके से हो रहा है। वहां के इमरजेंसी वार्ड में एक मरीज लाया जाता है,उस बीच बत्ती गुल हो चुकी होती है। मरीज़ को देखने के लिए ईएमओ नहीं बल्कि कोई और बाहर आता है। वह पहले तो कुछ पूछता है, उसके बाद ईएमओ के पास जा कर उन्हें बताता है।
ईएमओ के कहने पर वही शख्स अंदर से सिरिंज लेकर आता है और मोबाइल की टार्च दिखा कर उस मरीज के इंजेक्शन लगा कर चला जाता है। कितना अजीब है कि एक मेडिकल कालेज में सीएचसी से भी बद्तर बंदोबस्त देखने को मिला।
दरअसल बात मेडिकल कालेज के इमरजेंसी वार्ड की है। रात में एक महिला को वहां लाया जाता है। उस बीच इमरजेंसी में ब्लैक आउट जैसा नज़ारा दिखाई देता है। पूछने पर 'बस अभी-अभी बिजली गई' का जवाब दिया गया, लेकिन जब जनरेटर की बारी आई तो बताने वाले एक-दूसरे की बगले झांकने लगे। फिर बाद में पता चला कि ऐसा एक दिन नहीं,बिजली जाने पर जनरेटर शायद ही कभी चलता हो।
बोलने वाले तो यहां तक बोल गए कि जब डीज़ल नहीं तो भला जेनरेटर चले भी तो कैसे चले। उनका कहना था कि डीज़ल जनरेटर नहीं बल्कि कोई और गटक रहा है। लेकिन लाख टके का सवाल है कि इस तरह अंधेरे में इंजेक्शन लगाने से अगर किसी के इंफेक्शन हुआ तो उसका ज़िम्मदार भला कौन होगा ? बत्ती गुल होने पर जो देखा गया उससे पता चलता है कि मेडिकल कालेज का सारा निज़ाम बे-लगाम हो चुका है।
सबसे खास बात तो यह है कि इस मामले में कोई कुछ बोलना चाहिए चाहता, जबकि बात फंसने पर वहीं के तमाम ऐसे लोग हैं जो पैरवी करने आगे आ जाते हैं, लेकिन जब कहानी उलझती है तो झट से अपने पांव पीछे खींच लेते है,जैसे उन्हें कुछ पता ही नहीं।
डिप्टी सीएम को लग चुकी है भनक
मेडिकल कालेज में टार्च की रोशनी दिखा कर मरीज़ देखे जाने का मामला डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक तक पहुंच चुका है। हरदोई डिप्टी सीएम का अपना घर है,इस वजह से उन्हें यहां की हर एक एक्टिविटी पता चलती रहती है। ऐसा ही हुआ उन्हें सब कुछ पता चल चुका है। सुनने में आ रहा है कि उन्होंने जवाब तलब किया है। साथ ही ज़िम्मदारों से पूछा है कि आखिर ऐसा क्यों हुआ।
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