उप्र: श्रमिकों को रोडवेज बस से पहुंचाने में जमकर हुई डीजल चोरी
लखनऊ, अमृत विचार। कोविड-19 के दौरान सरकार ने श्रमिकों को पहुंचाने के लिए रोडवेज बसें किराए पर ली। इस दौरान बस चालकों ने किलोमीटर में हेराफेरी करके जमकर डीजल चोरी की। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से श्रमिकों को पहुंचाने के दौरान बीच रास्ते दूसरी बसों में श्रमिकों को शिफ्ट करके डीजल बेच दिया गया। जांच …
लखनऊ, अमृत विचार। कोविड-19 के दौरान सरकार ने श्रमिकों को पहुंचाने के लिए रोडवेज बसें किराए पर ली। इस दौरान बस चालकों ने किलोमीटर में हेराफेरी करके जमकर डीजल चोरी की। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट से श्रमिकों को पहुंचाने के दौरान बीच रास्ते दूसरी बसों में श्रमिकों को शिफ्ट करके डीजल बेच दिया गया। जांच में डीजल चोरी के कई प्रकरण मामले सामने आने पर राज्य सड़क परिवहन निगम मुख्यालय में हड़कंप मच गया है।
डीजल चोरी मामले में 30 से अधिक चालकों को चिन्हित किया गया है। इनमें 10 चालकों को किलोमीटर के आधार पर डीजल खर्च मामले में नोटिस देकर जवाब मांगा है। बाकी अन्य मामलों में जांच करके डीजल चोरी का खुलासा करने की तैयारी है। अभी तक डीजल चोरी में कैसरबाग और चारबाग डिपो से एक चालक को जेल व 4 को नौकरी से निकाला जा चुका है।
अब वीटीएस यानी व्हीकल ट्रैकिंग सिस्टम, इससे बस किस रूट पर कितने किलोमीटर चली। इसका ब्यौरा निकालकर डीजल खर्च की जांच की जाएगी। क्षेत्रीय प्रबंधक पल्लव बोस ने बताया कि लखनऊ क्षेत्र के सभी डिपो को लॉकडाउन से लेकर अभी तक खर्च हो रहे डीजल की जांच करके रिपोर्ट देने के निर्देश दिए गए हैं।
377 किमी का डीजल बेच दिया, चालक बर्खास्त
चारबाग डिपो के एआरएम अमरनाथ ने गुरुवार को एक संविदा बस चालक मणिशंकर पांडेय को डीजल चोरी में दोषी पाए जाने पर नौकरी से निकाल दिया। इस मामले में 377 किलोमीटर का डीजल खर्च का हिसाब चालक नहीं बता पाया।
मुख्यालय के जांच के आदेश को दबा दिया
परिवहन निगम मुख्यालय के मुख्य प्रधान प्रबंधक प्राविधिक जयदीप वर्मा ने लाकडाउन के दौरान डीजल खर्च की जांच करके एक सप्ताह में रिपोर्ट देने के आदेश दिए थे। क्षेत्रों में तैनात अधिकारियों ने जांच ही नहीं की। यही वजह है कि क्षेत्रों में श्रमिकों को पहुंचाने वाली बसों के डीजल खर्च मामले की कोई भी जांच रिपोर्ट आज तक मुख्यालय नहीं पहुंची।
