Kanpur: महापौर प्रमिला पांडेय का चट्टा हटाओ अभियान पड़ा सुस्त, चट्टा संचालकों के हौंसले बुलंद, शहर में चल रही दबंगई
कानपुर में महापौर प्रमिला पांडेय का चट्टा हटाओ अभियान सुस्त पड़ा।
कानपुर में महापौर प्रमिला पांडेय का चट्टा हटाओ अभियान सुस्त पड़ा। उत्तर समेत दक्षिण के कई मौहल्लों में चट्टे चल रहे है।
कानपुर, अमृत विचार। शहर से चट्टों को बाहर भेजने की योजना ने दम तोड़ दिया है। अधिकारियों की नाफरमानी की वजह से चट्टा संचालकों के हौंसले बुलंद हैं। दबंगई के बल पर शहर के कई क्षेत्रों में आज भी बेधड़क चट्टे चल रहे हैं। जिनसे निकल रहा गोबर सीधे सीवर लाइनों और नालों को जाम कर रहा है। उत्तर की अपेक्षा दक्षिण क्षेत्र में चट्टों की संख्या ज्यादा है। बर्रा बाईपास के किनारे, नौबस्ता, जूही बारादेवी और निराला नगर रेलवे ग्राउंड के पीछे अभी भी दर्जनों चट्टे संचालित हो रहे हैं। जिन्हें बाहर नहीं किया जा सका है।
शहर से चट्टों को हटाने की योजनाएं 10 साल पहले से चल रही हैं, लेकिन आज भी पूरी तरह चट्टों को शहर के बाहर भेजा नहीं जा सका है। अधिकारी दो-चार दिन कार्रवाई करते हैं जिसके बाद फिर शांत हो जाते हैं। चट्टा संचालकों की दबंगई की वजह से भी कई बार पुलिस और नगर निगम के आला अधिकारियों को पीछे हटना पड़ता है। महापौर प्रमिला पांडेय ने पिछले कार्यकाल में चट्टा हटाओ अभियान चलाया था, लेकिन कई जगह उन्हें विरोध झेलना पड़ा। जिसके बाद कार्रवाई तो हुई लेकिन, चट्टा संचालक नहीं हटे।
पहले चरण में 152 चट्टे हटाने थे
पहले चरण में जो 152 चट्टे हटाने थे इसके लिए केडीए ने 2009 में ही बिनगवां में फ्रीहोल्ड जमीन दे दी थी। कुल 992 चट्टे हटने हैं, 152 के लिए जमीन है, शेष 840 चट्टों के लिए अभी जमीन आवंटित की जानी है। हालांकि, सख्ती के बाद 35 फीसदी चट्टे बंद हो गए हैं।
पार्क, फुटपाथ और घरों में चल रहे चट्टे
आवास विकास केशवपुरम पार्क में लोगों ने कब्जा कर चट्टा बना लिया है। इसी तरह लखनपुर में सड़क पर चट्टा संचालित किया जा रहा है। जिससे यहां तालाब जैसे हालात हैं। बर्रा बाईपास के किनारे भी चट्टा संचालक ने 200 गज के क्षेत्र में चट्टा बना रखा है, जिसका गोबर और पानी को क्षेत्र में ही फेंका जा रहा है। जिससे गंदगी और बदबू का अंबार है। जूही बारादेवी क्षेत्र के पॉश इलाके में कई चट्टे एक साथ संचालित हो रहे हैं। यहां घरों और सड़कों पर कंडे रखे रहते हैं। इसके साथ जानवरों से निकलने वाला मल नालों में प्रवाहित किया जा रहा है। निराला नगर रेलवे ग्राउंड के पीछे घर-घर चट्टे संचालित हो रहे हैं। यहां पिछले साल महापौर ने कार्रवाई की तो चट्टा संचालकों ने पत्थर चला दिए थे।
कैटल कॉलोनी में ताला लगाकर भाग आए संचालक
बिनगवां में बनी कैटल कालोनी में भेजे गए 80 चंट्टे वाले फिर भूखंडों में ताला लगाकर शहर वापस आ गए। कैटल कॉलोनी बिनगवां में केडीए ने 152 भूखंड विकसित किए थे। जहां पहले चरण में 150 से ज्यादा चट्टों को भेजा जाना था। इसके लिए नगर निगम और खास तौर पर महापौर ने अभियान तो चलाया लेकिन सफलता नहीं मिली।
अभी तक चट्टा हटाने के हुए प्रयास
- कमिश्नर मो. इफ्तिखारुद्दीन ने 2016 में शहर के चट्टों को तीन महीने में हटाने के लिए अभियान चलाने के दिए निर्देश, पर हुआ कुछ नहीं
- मुख्यमंत्री के आदेश पर शहर के चट्टों को 2019 में तत्कालीन नगर आयुक्त ने कार्रवाई की शुरू, लेकिन कुछ चट्टे ही हटे
- महापौर प्रमिला पांडेय ने 2020 में शहर से चट्टा हटाओ अभियान शुरू किया, कई चट्टे हटे भी लेकिन फिर काबिज हो गए
- इस दौरान अभियान चला रहे अधिकारियों पर पैसे लेकर मवेशी छोड़ने का लगा आरोप
पिछले कार्यकाल में मैंने खुद चट्टा हटाने के लिए अभियान चलाया। कईयों ने शहर में चट्टों को बंद कर दिया है। जहां अभी खुले हैं वहां फिर से अभियान चलाया जाएगा।- प्रमिला पांडेय, महापौर
