बचाव की तैयारी
कोरोना वायरस लगातार आम आदमी की परेशानी बढ़ा रहा है। इस बीच लाखों लोगों की जिंदगी पर संकट आ चुका है। कोरोना किसी एक देश की समस्या नहीं है लेकिन अन्य बाकी देशों में कोरोना संक्रमण के मामले थमने शुरू हो गए हैं। इधर देश में शुक्रवार को कोरोना के नए मामलों ने रिकॉर्ड तोड़ …
कोरोना वायरस लगातार आम आदमी की परेशानी बढ़ा रहा है। इस बीच लाखों लोगों की जिंदगी पर संकट आ चुका है। कोरोना किसी एक देश की समस्या नहीं है लेकिन अन्य बाकी देशों में कोरोना संक्रमण के मामले थमने शुरू हो गए हैं। इधर देश में शुक्रवार को कोरोना के नए मामलों ने रिकॉर्ड तोड़ दिया।
पिछले 24 घंटों में 83,341 नए मरीज सामने आए और 1,096 लोगों की मौत हो गई। जबकि देश में अब कुल संक्रमितों की संख्या 39 लाख के पार हो चुकी है और इनमें से 68 हजार से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। हालांकि पिछले कई महीनों में ठीक होने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। रिकवरी दर बढ़कर 77.15 प्रतिशत हो गई है।
अनलाक के बाद से लोगों की परेशानी थोड़ी कम हुई है, तो इसकी वैक्सीन को लेकर नई उम्मीदें बंध रही हैं। देश में भी कोरोना की तीन वैक्सीन पर काम चल रहा है। पहली वैक्सीन पुणे के सीरम इंस्टीट्यूट की है, जो ऑक्सफोर्ड के साथ मिलकर बनाई गई है। इसे कोविशील्ड के नाम से लांच किया जाएगा। दूसरी वैक्सीन, भारत बायोटेक की है, जिसका नाम कोवैक्सिन है।
तीसरी वैक्सीन जाइडस कैडिला की है। इन तीनों का परीक्षण अभी अलग-अलग स्तरों पर चल रहा है और उम्मीद की जानी चाहिए कि ये शीघ्र ही इस्तेमाल के लिए तैयार होंगी। लेकिन क्या इनकी उपलब्धता आम जनता के लिए भी सरलता से हो पाएगी, यह बड़ा सवाल है। इसे देश की 130 करोड़ की आबादी तक कैसे पहुंचाया जाएगा इस बारे में सरकार की कोई तैयारी नहीं होना चिंता की बात है। ध्यान रखना होगा कि देश को पोलियोमुक्त करने के लिए बड़े अभियान और जनजागरुकता की जरूरत पड़ी थी।
पोलियो उन्मूलन के लिए केवल पांच साल तक के बच्चों को इसकी खुराक दी जानी थी। लेकिन कोरोना से तो सारी आबादी को सुरक्षित रखना होगा। इसके लिए यह जरूरी है कि जब भी वैक्सीन आए तो भेदभाव से परे हर नागरिक तक इसकी पहुंच हो। बेहद जरूरी है कि वैक्सीन सभी को उपलब्ध हो सके। यह काम सरकार की दूरगामी रणनीति से ही संभव है। बिना तैयारी के इसको कैसे किया जा सकता है। वैक्सीन के वितरण से जुड़ी समस्या को सुलझाने के लिए कुछ उपाय करने जरूरी हैं। दवाई विकसित होने के बाद इसका सही वितरण ही मानवता की सच्ची सेवा और उसकी रक्षा होगी।
