प्रयागराज : अध्यापकों के वेतन से अतिरिक्त किराया भुगतान की रिकवरी के आदेश पर रोक
प्रयागराज, अमृत विचार। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वर्ष 2018 से जनवरी 2023 तक हुए अतिरिक्त भुगतान को अध्यापकों के वेतन से रिकवरी करने के आदेश पर रोक लगाते हुए उत्तर प्रदेश राज्य सरकार, बेसिक शिक्षा अधिकारी, भदोही और वित्त एवं लेखाधिकारी, भदोही से 4 सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। उपरोक्त आदेश न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की एकलपीठ ने अशोक सिंह 161 अन्य की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया। याचीगण जनपद भदोही में उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा परिषद द्वारा संचालित विभिन्न प्राथमिक विद्यालयों में सहायक अध्यापक एवं हेड मास्टर के पद पर कार्यरत हैं।
मालूम हो कि राज्य सरकार ने 18 जुलाई 2018 को एक शासनादेश जारी किया था, जिसमें भदोही को अवर्गीकृत श्रेणी में रख दिया गया, जिससे उक्त जिले के शहरी क्षेत्र गोपीगंज, खमरिया, सुरियावां ,नई बाजार आदि में स्थित विद्यालयों सहित इन क्षेत्रों की परिधि में आने वाले अन्य विद्यालयों का शहरी किराया भत्ता बंद हो गया, लेकिन इन क्षेत्रों के अध्यापकों को जनवरी 2023 तक शहरी मकान किराया भत्ता मिलता रहा। इसके बाद कुछ ऑडिट आपत्तियां उठाई गईं, जिसके कारण याचियों को देय मकान किराया भत्ता कम कर दिया गया और वित्त एवं लेखाधिकारी, भदोही ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को उपरोक्त गड़बड़ी का हवाला देते हुए जुलाई 2018 से जनवरी 2023 तक हुए अतिरिक्त भुगतान को अध्यापकों के वेतन से रिकवरी करने का आदेश जारी कर दिया।
प्रभावित अध्यापकों में से यांची अशोक सिंह सहित 161 अध्यापकों ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में उक्त शासनादेश को चुनौती देते हुए याचिका दाखिल कर पूर्व स्थिति को बहाल करने की मांग की। याचियों के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वर्ष 2018 के सरकारी आदेश में किया गया वर्गीकरण कानूनी नहीं है और शहरों के बीच एक कृत्रिम वर्गीकरण करने का प्रयास किया गया है। अंत में कोर्ट ने सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय का हवाला देते हुए निष्कर्ष निकाला कि अगर सरकारी कर्मचारियों को कोई अतिरिक्त राशि का भुगतान किया गया है और उसकी ओर से कोई गलत बयानी या धोखाधड़ी नहीं हुई है तो उक्त अतिरिक्त राशि की वसूली नहीं की जा सकती है। अतः चार सप्ताह के भीतर उत्तरदाताओं को जवाब हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया और उसके बाद याचियों को प्रत्युत्तर हलफनामा दाखिल करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया।
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