देश छोड़ने वाले
पिछले दो दशक में काम करने के लिए देश छोड़कर विदेश जाने वाले भारतीय नागरिकों की संख्या काफी अधिक हो गई है। सरकार का दावा है कि इनमें से अधिकतर ने व्यक्तिगत सुविधा के कारणों से विदेशी नागरिकता लेने का विकल्प चुना है। शुक्रवार को सरकार ने लोकसभा को बताया कि पिछले साढ़े तीन वर्षों में 5,61,272 भारतीय नागरिकों ने अपनी नागरिकता छोड़ी है।
विदेश मंत्री जयशंकर ने बताया कि मंत्रालय के पास उपलब्ध जानकारी के अनुसार वर्ष 2020 में 85,256, वर्ष 2021 में 1,63,370 , वर्ष 2022 में 2,25,620 तथा वर्ष 2023 में जून तक 87,026 भारतीय नागरिकों ने नागरिकता छोड़ी। ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर भारतीय अपनी नागरिकता छोड़ क्यों रहे हैं?
सामान्य तौर पर, दुनिया भर में लोग बेहतर नौकरियों और रहने की स्थिति के लिए अपना देश छोड़ देते हैं, लेकिन अलग-अलग देशों और विभिन्न सामाजिक-आर्थिक समूहों के बीच इसके कारण अलग-अलग होते हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारतीय नागरिकता छोड़ने वाले भारतीयों की सबसे बड़ी संख्या संयुक्त राज्य अमेरिका, इसके बाद ऑस्ट्रेलिया, कनाडा और यूनाइटेड किंगडम गई।
नागरिकता छोड़ने वालों में से कम संख्या में लोगों ने इटली न्यूजीलैंड , सिंगापुर , जर्मनी, नीदरलैंड्स, स्वीडन और स्पेन को चुना। ज्यादातर लोग बेहतर काम, पैसे और बेहतर ज़िदगी की तलाश में देश छोड़कर जाते हैं। विदेश जाकर बसने वालों में अधिकांश लोग ऐसे भी होते हैं जो देश से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करते हुए भी अन्य देश की नागरिकता ले लेते हैं।
ऐसे लोगों के मुताबिक वहां ज़िंदगी बहुत आसान है। जीवन शैली बहुत अच्छी है। बच्चों की पढ़ाई अच्छे से हो जाती है, और उन्हें मौके भी अपने देश से बेहतर मिलते हैं। साथ ही काम करने का अच्छा माहौल मिलता है। इन सब कारणों से वे भारत वापस नहीं जाना चाहते। दरअसल भारत में दोहरी नागरिकता का प्रावधान नहीं है। यानी अगर आप किसी और देश की नागरिकता चाहते हैं तो आपको भारत की नागरिकता छोड़नी होगी।
भारत अगर दोहरी नागरिकता का प्रावधान लाता है तो नागरिकता छोड़ने वालों में कमी आ जाएगी। सरकार ने माना भी है कि उसे इस घटनाक्रम की जानकारी है और उसने ‘मेक इन इंडिया’ पर केंद्रित कई पहल शुरू की हैं जो घरेलू स्तर पर देश की प्रतिभाओं का उपयोग कर सकेंगी। वास्तव में अगर भारत को अपनी नागरिकता छोड़ने की दर या फिर ब्रेन ड्रेन पर काबू करना है तो उसे कई कदम उठाने होंगे। इनमें बेहतर सुविधा, नए मौकों से लेकर दोहरी नागरिकता पर विचार करना ज़रूरी है।
