बरेली: जिम्मा नौनिहालों की सेहत सुधारने का, पर खुद कुपोषण का शिकार
2857 आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे तीन सीडीपीओ और 16 सुपरवाइजरों के सहारे
बरेली, अमृत विचार। नौनिहालों को सेहतमंद बनाने का जिम्मा संभालने वाला बाल विकास विभाग इन दिनों खुद कुपोषण का शिकार है। इसका असर विभागीय कार्यों पर तो पड़ ही रहा है, साथ ही कुपोषण से निपटने की योजना भी ब्लॉकों में लड़खड़ा गई है।
विभागीय कर्मी बताते हैं जिले में इस समय सीडीपीओ से लेकर सुपरवाइजर व सहायकों तक के पद लंबे समय से खाली हैं। प्रभावी मानीटरिंग न होने पर आगंनबाड़ी केंद्रों में नौनिहालों को सुविधा देने के नाम पर मात्र खानापूरी हो रही है। इससे कुपोषित बच्चों में कमी नहीं आ रही है। विभागीय आंकड़े बताते हैं जिले में 15 ब्लाक और नगर क्षेत्र में सीडीपीओ के 16 पद स्वीकृत हैं। इसके सापेक्ष ब्लाकों में 13 सीडीपीओ के पद रिक्त होने पर या तो मुख्य सेविका या फिर दूसरे ब्लाकों के सीडीपीओ पर अतिरिक्त प्रभार है।
वहीं, जिले में 2857 आंगनबाड़ी केंद्रों पर पंजीकृत करीब तीन लाख बच्चों की देखरेख के लिए 104 सुपरवाइजर की तैनाती होनी चाहिए लेकिन यहां भी स्थिति चिंताजनक है। महज 16 सुपरवाइजर होने पर कई केंद्रों का अतिरिक्त प्रभार उनके पास है।
इन ब्लाकों में खाली हैं सीडीपीओ के पद
ब्लाक शेरगढ़ और बहेड़ी में सीडीपीओ की तैनाती हैं, जबकि बिथरीचैनपुर, भुता, दमखोदा, भदपुरा, फतेहगंज पश्चिमी, मीरगंज, क्यारा, रामनगर, फरीदपुर में मुख्य सेविकाओं को सीडीपीओ को चार्ज दे रखा है। मझगवां ब्लाक के सीडीपीओ कृष्ण चंद्र पर जिला कार्यक्रम अधिकारी का अतिरिक्त चार्ज है।
किराये के भवन में चल रहे केंद्र
शहरी क्षेत्र में 115 आंगनबाड़ी केंद्र हैं, इनमें करीब 90 प्रतिशत केंद्र किराये के भवनों में चल रहे हैं। केंद्रों में काम करने वाली महिलाओं को न तो समय पर केंद्र का किराया मिलता है और न ही मानदेय। यहां तक कि सुविधाएं घटने के कारण बच्चों की संख्या भी कम हो रही है।
खाली पड़े पदों को भरने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है। जैसे ही आदेश आएगा उसी के अनुसार जिले में अधिकारियों और कर्मचारियों की कमी को पूरा किया जाएगा - कृष्ण चंद्र, जिला कार्यक्रम अधिकारी।
पद - स्वीकृत - रिक्त
सीडीपीओ -16 - 3
सुपरवाइजर -104 -16
मुख्य सेविका -104 -16
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