बरेली: पहले 40 से 50 फीसदी बेटियों को मिल जाती थी नौकरी... अब दस फीसदी को ही

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कम वेतन पर बाहर जाने की चुनौती ने घटाए अवसर, कई सालों से लगातार घट रही है नौकरी पाने वाली लड़कियों की संख्या

अनुपम सिंह/बरेली, अमृत विचार। परीक्षाओं में भले ही लड़कियां हर साल नए कीर्तिमान स्थापित लड़कों को पीछे छोड़ती हों लेकिन नौकरियों में उनके लिए अवसर तेजी से कम होते जा रहे हैं। रोजगार कार्यालय के पिछले आठ साल के आंकड़े बताते हैं कि पांच सालों में उन्हें लड़कों के मुकाबले बमुश्किल 10 फीसदी ही नौकरियां मिल पाई हैं जबकि इससे पहले यह अनुपात 40 से 50 फीसदी तक था।

लड़कियों के लिए रोजगार के अवसरों की कमी के पीछे सबसे बड़ी वजह स्थानीय स्तर पर नौकरियों का न होना है। बरेली जैसा शहर, जहां औद्योगिकीकरण का दायरा बढ़ने के बजाय और कम होता जा रहा है, वह बेटियों के अपने पैरों पर खड़े होने की राह में सबसे बड़ा रोड़ा है। पिछले सालों में गिनीचुनी संख्या में जिन बेटियों को रोजगार मेलों के जरिए नौकरी मिली भी है, उन्हें मामूली वेतन के लिए घर छोड़ना पड़ा है। ये नौकरियां पाने वाली बेटियों की मजबूरी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उनके वेतन का औसत 15 से 20 हजार रुपये रहा है और इसके लिए उन्हें बरेली छोड़कर गुड़गांव, जयपुर, नोएडा, गाजियाबाद जैसे शहरों में सैकड़ों किलोमीटर दूर जाना पड़ा है।

इसका भी असर : बढ़ती रही महंगाई, कम होता रहा वेतन
पिछले कई सालों से लगातार महंगाई बढ़ने के बावजूद प्राइवेट कंपनियों की ओर से वेतन स्थिर रखने या घटा दिए जाने को भी नौकरी करने की इच्छुक बेटियों के लिए प्रतिकूल माना जा रहा है। रोजगार की स्थिति पर नजर रखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे शहरों की कंपनियां सामान्य नौकरियों में इतना भर ही वेतन दे रही हैं कि कोई व्यक्तिगत खर्च ही बमुश्किल पूरा कर पाए। लड़कियों के लिए ये परिस्थितियां ज्यादा मुश्किल हैं। उन्हें कई और चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

दस सालों में सिर्फ तीन हजार को मिली नौकरी
सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक पिछले दस सालों में आयोजित 121 राेजगार मेलों में 31 हजार 570 बेरोजगारों को नौकरियां मिलीं। मगर इनमें से करीब आठ हजार युवाओं ने अलग-अलग वजहों से नाैकरी से किनारा कर लिया। इनमें से करीब तीन हजार से ज्यादा महिलाएं हैं जो अलग-अलग सेक्टर में काम कर रही हैं। कुछ ही ऐसी हैं जिन्हें किस्मत से जिले में ही नौकरी मिल गई।

रोजगार मेलों के जरिए मिलीं नौकरियां

वर्ष                         पुरुष             महिला

2015-16             500                         157
2016-17             340                         169

2017-18             2155                        502

2018-19             4190                        559

2019-20             2494                        275

2020-21             7855                        186

2021-22             4662                        425

2022-23             6098                        703

केस-1
इज्जतनगर की रहने वाली अनीता के मुताबिक उन्हें तीन साल पहले रोजगार मेले के जरिए राजस्थान की एक कंपनी में नौकरी मिली थी। शुरू में 15 हजार वेतन था। अनीता के मुताबिक इतने कम वेतन में पहले इतनी दूर जाने की हिम्मत नहीं पड़ी, लेकिन फिर खुद को मजबूत किया। शुरू में काफी दिक्कत हुई, अब वेतन भी 30-35 फीसदी बढ़ गया है। काम भी समझ में आ रहा है।

केस-2
नवाबगंज की पूजा का कहना है आईटीआई करने के बाद बहुत कोशिश की लेकिन कहीं नौकरी नहीं लग पा रही थी। इस बीच रोजगार मेला लगा तो वहां जाकर इंटरव्यू दिया। कंपनी ने सेलेक्ट कर पहले साढ़े 17 हजार रुपये सैलरी पर नोएडा भेजा। घर से बाहर कभी नहीं गई थी लेकिन मौका छोड़ नहीं सकती थीं। हिम्मत करके गई और मेहनत से काम किया। अब सैलरी भी कुछ बढ़ गई है।

मार्केटिंग की ओर रुझान
ज्यादातर युवतियों को मार्केटिंग का जॉब रास आता है। वजह यह है कि यह दिन का काम हैं। रात में सुरक्षा कारणों से वे घर में रहने पर जोर देती हैं।

रोजगार मेले में काफी बेरोजगार युवतियां भी नौकरी के लिए आती है। पहले की अपेक्षा उनकी संख्या और बढ़ी है। जिन्हें नौकरी की जरूरत है, वे घर-परिवार छोड़कर दूरदराज भी नौकरी कर रहीं हैं - त्रिभुवन सिंह, सहायक निदेशक सेवायोजन बरेली मंडल।

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