बरेली: महिला हेल्प डेस्क... खुद समस्याओं से घिरीं
ज्यादातर थानों में स्थिति बदतर, बारादरी में खुले में चल रही, नाममात्र की दर्ज हो रही शिकायतें
बरेली, अमृत विचार। महिलाएं अपनी समस्याएं खुलकर रख सकें इसलिए सभी थानों में महिला हेल्प डेस्क स्थापित की गईं और इसका जिम्मा भी महिला स्टाफ को सौंपा गया लेकिन ज्यादातर थानों में हेल्प डेस्क की स्थिति बदतर है। जिस उद्देश्य से इनकी स्थापना की गई थी ये उस पर खरी नहीं उतर रही हैं। शहर के अधिकतर थानों में महिला हेल्प डेस्क ऐसे स्थान पर हैं जहां पुरुष भी पहुंच जाते हैं, जबकि इन्हें अलग कमरे में खोलने के निर्देश थे ताकि महिलाएं अपनी समस्या बिना किसी संकोच के महिला अधिकारी के सामने रख सकें। बृहस्पतिवार को सदर तहसील, बारादरी, कोतवाली समेत अन्य थानों में स्थापित महिला हेल्प डेस्क की पड़ताल की गई तो महिला थाने को छोड़कर सभी थानों में कमोबेश यही स्थिति मिली। पेश है अमृत विचार की संवाददाता प्रीति कोहली की रिपोर्ट।
सीन 1
प्रभारी बैठीं थी पर फरियादी कोई नहीं आया
कोतवाली के अंदर एक कमरे में हेल्प डेस्क खुली हुई है। दोपहर करीब दो बजे यहां हेल्प डेस्क प्रभारी बैठी थीं। कोई फरियादी नहीं दिखा। उन्होंने बताया कि अब तक कोई मामला नहीं आया है। जून में 10 मामले आए थे। जुलाई में अब तक आठ मामले आए हैं, इनका निस्तारण किया जा चुका है।
सीन- 2
खुले में कुर्सी-मेज डालकर खोल दी हेल्प डेस्क
बारादरी थाने में महिला हेल्प डेस्क को परिसर में खुले स्थान पर कुर्सी मेज डालकर खोल दिया गया है। जहां अक्सर पुरुष फरियादियों और पुलिसवालों का आना-जाना लगा रहता है। जिससे महिलाएं चाहकर भी खुलकर अपनी बात हेल्प डेस्क स्टाफ से नहीं कह पातीं। इस महीने यहां 32 मामले आए, मगर निस्तारण कितनों का हुआ कोई बताने वाला नहीं था।
सीन 3
दो महीनों में दर्ज नहीं हुई एक भी शिकायत
सदर तहसील में खोली गई हेल्प डेस्क पर सन्नाटा पसरा है। यहां न कोई कर्मचारी था न ही कोई फरियादी। जिस केबिन में हेल्प डेस्क खोली गई है उसकी कुंडी बंद थी। पूछने पर एक कर्मचारी वहां पहुंचा और उसने कुंडी खोली। यहां अप्रैल और मई में कोई भी शिकायत दर्ज नहीं की गई। जून में सात और जुलाई में 13 शिकायतें दर्ज हुई, इनमें भी नाम मात्र का ही निस्तारण हो सका है।
सीन- 4
सुनवाई के साथ समस्या का हो रहा निस्तारण
महिला थाने में व्यवस्थाएं काफी हद तक ठीक मिलीं। महिला हेल्प डेस्क प्रभारी ने बताया कि यहां ज्यादातर मामले पति के शराब पीकर मारपीट से जुड़े आते है। घरेलू हिंसा से जुड़े मामलों को परामर्श केंद्र भेजा दिया जाता है। काउंसलिंग की व्यवस्था भी महिलाओं के लिए है। एक महीने में कई मामले निस्तारित हो जाते है। जून में कुल 178 मामले आए इनमें से 175 का निस्तारण हो चुका है। जुलाई में अब तक 35 मामले आए हैं, इनमें भी कई निस्तारित हो चुके है।
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