बरेली: पीएमईजीपी के परवान चढ़ने में बैंकों का अड़ंगा

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बरेली,अमृत विचार। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य बेरोजगारों को रोजगार दिलाना है। लेकिन जिले में बैंकों की मनमानी सरकार की मंशा को पलीता लगा रही है। शनिवार को जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में प्रधानमंत्री सृजन रोजगार योजना (पीएमईजीपी) की हकीकत उजागर होने पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार …

बरेली,अमृत विचार। प्रधानमंत्री के आत्मनिर्भर भारत अभियान का मुख्य उद्देश्य बेरोजगारों को रोजगार दिलाना है। लेकिन जिले में बैंकों की मनमानी सरकार की मंशा को पलीता लगा रही है। शनिवार को जिला विकास समन्वय और निगरानी समिति (दिशा) की बैठक में प्रधानमंत्री सृजन रोजगार योजना (पीएमईजीपी) की हकीकत उजागर होने पर केंद्रीय मंत्री संतोष गंगवार ने 198 लाभार्थियों को लोन नहीं मिलने पर बैंकों के प्रति नाराजगी जताई।

उद्योग केंद्र के अफसरों के मुताबिक बेरोजगारों को रोजगार मिल सके। इसलिए शासन ने पीएमईजीपी योजना लागू की। इसके तहत जिले को 232 लाभार्थियों का लक्ष्य मिला था। विभाग ने योजना को लेकर प्रचार प्रसार कराया। जिसके बाद करीब 425 बेरोजगारों ने आवेदन किया था।

पात्रता के आधार पर उद्योग केंद्र से लक्ष्य के सापेक्ष 232 लाभार्थियों का चयन कर लोन देने के लिए फाइल संबंधित बैंकों को भेज दी गईं। लेकिन बैंकों ने इनमें मात्र 34 फाइल ही स्वीकृत कीं। 84 फाइलों को खामियां गिनाकर वापस कर दिया। कुल 198 प्रकरण बैंक में अभी लंबित हैं। ऐसे में इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है। युवाओं के आत्मनिर्भर बनने की मंशा पर बैंक किस तरह पलीता लगा रहे हैं।

यह आलम तब है जब मंडलीय बैठक में कमिश्नर बैंक कर्मियों की इस लेटलतीफी पर नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। शनिवार को दिशा की बैठक में भी यह मामला उठा था। उद्योग केंद्र के अफसरों का कहना है उनके यहां से पत्रावली की जांच उपरांत फाइलों को बैंक भेजा जाता है, लेकिन बैंक खामियां बताकर अधिकांश फाइलों को लौटा देती हैं। पूर्व में भी यह मामला कई बार अफसरों के संज्ञान में लाया जा चुका है।

“2020-21 में पीएमईजीपी योजना के तहत कुल 232 लाभाथयों के चयन का लक्ष्य मिला था। सभी की चयन प्रक्रिया पूरी कर उनको लोन दिए जाने के लिए बैंकों को संस्तुती भेजी गई। लेकिन बैंक ने मात्र 34 लोगों को ही लोन बांटा है।” -आरआर गोयल, उपायुक्त उद्योग

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