शाहजहांपुर: या हुसैन की सदाओं के बीच कर्बला में दफनाए गए ताजिए

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मोहर्रम पर शहर में तमाम स्थानों से उठाए गए ताजिए, पढ़ी गईं नातें और मनकबत

शाहजहांपुर, अमृत विचार। मोहर्रम की 29 तारीख को पूरे दिन ताजिएदारी की जाती रही। शनिवार को मुस्लिम समाज के लोगों ने हसन हुसैन की शहादत याद करते हुए गमगीन माहौल में ताजिए घरों से निकाले और ठेलों पर रखकर करबला तक लेकर आए, जहां ताजियों को दफन किया गया। इस दौरान करबला में सिटी मजिस्ट्रेट डॉ. वेद प्रकाश मिश्रा, सीओ सिटी एसवी वीर कुमार समेत तमाम सुरक्षाकर्मी मौजूद रहे।

मोहर्रम पर शनिवार को किला, बिजलीपुर, अंटा, ताजूखेल, एमनजई जलालनगर, दिलाजाक, रेती, दलेलगंज, लोधीपुर, अंजान चौकी क्षेत्र, हद्दफ आदि स्थानों से ताजिए घरों ने निकाले गए। ताजियों के जुलूस के दौरान हसन हुसैन की याद में नातें और मनकबत पढ़ी और बजाई जा रही थीं। युवा हाथों में लाल और हरे झंडे लेकर या हुसैन के नारे बुलंद कर रहे थे। शहर में अलग-अलग क्षेत्रों से निकाले गए ताजिए क्षेत्रीय करबला तक लाए गए, जहां पूरी अकीदत के साथ उन्हें दफन किया जाता रहा। जहां-जहां से ताजिए निकाले जा रहे थे, वहां सुरक्षा के कड़े प्रबंध देखने को मिले। बड़ी संख्या पुलिसकर्मी सभी का सहयोग करते हुए ताजियों को निकलवा रहे थे।

करबला के बाहर मुख्य मार्ग पर झूले, हलवा-पराठा समेत तमाम प्रकार की दुकानें भी सजी हुई हैं। ताजिएदारी का सिलसिला दोपहर बाद से शुरू हो गया था, जो देर रात तक चलता रहा। चूंकि चमकनी करबला अंटा चौराहा के समीप ही स्थित है, इसलिए खिरनीबाग चौराहा से जेल मार्ग बंद करवा दिया गया था। ताकि ताजिया निकालने वालों को किसी प्रकार की परेशानी न हो। उधर, पुराना जिला अस्पताल से अंटा चौराहा की ओर आने वाला रास्ता भी बंद रहा। रास्ता बंद होने से आम लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ा। उन्हें दूसरे रास्तों से निकाला गया।

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