अयोध्या : राम मंदिर का बदला मार्ग, वीरान हो गए 10 से अधिक मन्दिर
श्रद्धालुओं के आने से मंदिरों में भगवान के भोग-राग की होती थी व्यवस्था
अयोध्या, अमृत विचार। अयोध्या में राम मंदिर जाने का मार्ग बदल जाने के कारण पुराने रास्ते के 10 से भी अधिक मन्दिर वीरान हो गए हैं। जिन मंदिरों में कभी भक्तों का तांता लगा रहता था वहां आज भूले-भटके श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। इन मंदिरों में आने वाले श्रद्धालुओं की बदौलत ही भगवान का भोग-राग व साधु-संतों की व्यवस्थाएं निर्भर होती थी। 72 वर्षों के बाद ऐसा देखने को मिला है कि रामनगरी के इन करीब दस मंदिरों में सन्नाटा पसरा है।
राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण का कार्य चल रहा है, जिसे देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं के दर्शन मार्ग में बदलाव कर दिया। श्रद्धालु जन्मभूमि पथ से सीधे राम मंदिर में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन विराजमान भगवान श्रीरामलला के दर्शन मार्ग में बदलाव करने से पुराने रास्ते के एक दर्जन मंदिरों तक श्रद्धालु नही पहुंच पा रहे हैं। अब इन मंदिरों में सन्नाटा छाया हुआ है।
राम जन्मभूमि परिसर में आजादी के बाद 1949 में भगवान रामलला का प्राकट्य हुआ था, जिसके बाद से अयोध्या आने वाले श्रद्धालु दर्शन करने के लिए हनुमान गढ़ी के दर्शन कर अमावां मंदिर, राम कचेहरी, लवकुश मंदिर, जगन्नाथ मंदिर और रंग महल के रास्ते से ही परिसर में प्रवेश करते थे, लेकिन अब इस रास्ते में बदलाव के बाद पड़ने वाले एक दर्जन मंदिर में श्रद्धालुओं नही पहुंच रहे हैं, जिसमें राजमहल, रंग महल, जगन्नाथ मंदिर, लवकुश मंदिर, राम कचेहरी, सुंदर भवन, श्रृंगारकुंज, कैकेई कोप भवन, रामलला सदन जैसे मंदिर शामिल हैं।
श्रृंगार भवन के अधिकारी पंडित नीरज गोस्वामी ने बताया कि अयोध्या के मंदिरों में भगवान का भोग राग और इनमें रहने वाले साधु संतों की व्यवस्था आने वाले श्रद्धालुओं पर निर्भर होती है। बड़ी संख्या में पहुंचने वाले श्रद्धालु इन मंदिरों में भी दर्शन पूजन करते हैं, लेकिन अब श्रद्धालुओं के आने की संख्या बहुत कम हो रही है। राम मंदिर में दर्शन करने के बाद श्रद्धालु उसी रास्ते से बाहर चले जा रहे हैं, जिसके कारण अब मंदिर के संचालन में कुछ दिक्कतें आएंगी।
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