बरेली: एक ही बच्चे ने लिया तीन बार जन्म, अब देहरादून में कर रहा डॉक्टरी की पढ़ाई...प्रमाणपत्र जारी करने पर उठे सवाल
बरेली, अमृत विचार। प्रमाणपत्रों के लिहाज से एक ही बच्चे ने तीन बार जन्म लिया। दो बार उसके जन्म का प्रमाणपत्र नगर निगम की ओर से जारी हुआ। तीसरी बार उसका जन्म सितारगंज (उत्तराखंड) में दिखाया गया जिसके जरिए वह अब देहरादून में डॉक्टरी की पढ़ाई कर रहा है। नगर निगम के अधिकारी उसके जन्म प्रमाणपत्रों को फर्जी बता रहे हैं।
नगर निगम में मनमाफिक जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र बनाने के पहले भी आरोप लगते रहे हैं। अब एक ही बच्चे के दो प्रमाणपत्र जारी करने पर सवाल उठ रहे हैं। इस बच्चे को तहसील सदर से पिछड़ी जाति का भी प्रमाणपत्र जारी किया गया है। तीसरी बार यह बच्चा पिछड़े वर्ग के परिवार में सितारगंज में पैदा हुआ और उसने कई सरकारी योजनाओं का भी लाभ लिया है। जनकपुरी के रजनीश श्रीवास्तव ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी को पत्र भेजकर फर्जी जन्म प्रमाण पत्र जारी करने वालों पर एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है।
हर प्रमाणपत्र में घटती-बढ़ती रही जन्मतिथि
रजनीश के मुताबिक 568, जनकपुरी के पते पर 26 जून 1996 को एक लड़के का जन्म प्रमाण पत्र जारी किया गया, जिसका जन्मस्थान राजेंद्रनगर का शुभम मैटरनिटी होम दिखाया गया। दूसरा प्रमाण पत्र अंकित श्रीवास्तव के नाम पर इसी पते पर तीन फरवरी 2000 को बनाया गया। इसी अंकित श्रीवास्तव ने तीसरा प्रमाण पत्र 1997 में भूमिया कॉलोनी तहसील सितारगंज, जिला उधमसिंह नगर (उत्तराखंड) के पते पर बनवाया है।
चार साल पहले मरा शख्स प्रमाणपत्र में जीवित
इस बीच सोशल मीडिया पर नगर निगम का प्रमाण पत्र वायरल हुआ है। यह बिथरी चैनपुर के सीएससी सेंटर से बनाया गया है। इसमें 2019 में मृतक व्यक्ति को 2023 में जीवित बता दिया गया है। असली जैसे दिख रहे इस प्रमाण पत्र पर शक उस समय हुआ, जब इसके जारी होने की तारीख रविवार यानी अवकाश के दिन की दर्ज कर दी गई। वरिष्ठ अधिवक्ता मुहम्मद खालिद जीलानी का कहना है कि एक ही व्यक्ति के तीन जन्म प्रमाण पत्र जारी होना और उनके जरिए दो प्रांतों से अनुचित लाभ लेना अपराध है। ऐसा व्यक्ति यदि पढ़ाई कर रहा है तो उसकी डिग्री भी अमान्य करनी चाहिए।
नगर निगम का प्रमाण पत्र फर्जी नहीं हो सकता। उसमें बार कोड होता है जिसे स्कैन करने पर सभी जानकारी सामने आ जाती है। सोशल मीडिया पर वायरल जन्म प्रमाण पत्र लेकर श्रम विभाग के लोग भी आए थे। उसमें बार कोड नहीं है--- सर्वेश गुप्ता, अपर नगर आयुक्त।
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