नीतिगत दर पर यथास्थिति बरकरार रख सकता है आरबीआई: विशेषज्ञ
कोलकाता। विशेषज्ञों का मानना है कि मुद्रास्फीति बढ़ने के बावजूद भारतीय रिजर्व बैंक अगले सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा में नीतिगत दर को यथावत रख सकता है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति की आठ से 10 अगस्त तक बैठक होगी।
मौद्रिक नीति समीक्षा की घोषणा 10 अगस्त को की जाएगी। बेंगलुरु स्थित आंबेडकर स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रोफेसर एन. आर. भानुमूर्ति ने एक न्यूज एजेंसी से कहा, हालाकि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़ रही है, जिसका मुख्य कारण खाद्य मुद्रास्फीति है लेकिन तब भी कर्ज की मांग स्थिर बनी हुई है... मुझे नहीं लगता कि आरबीआई इसे नजरअंदाज करेगा। वह संभवतः ब्याज दर पर यथास्थिति बनाए रखेगा।
उन्होंने कहा, ...मौसमी प्रभाव के कारण खुदरा मुद्रास्फीति 5.5 प्रतिशत के आसपास रह सकती है और अगर हम इसे हटा दें तो यह 4 से 4.5 प्रतिशत के आसपास होगी। उल्लेखनीय है कि खुदरा महंगाई दर जून में बढ़कर 4.81 प्रतिशत हो गयी जो मई में 4.31 प्रतिशत थी। बंधन बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सिद्धार्थ सान्याल ने कहा कि अगली एमपीसी बैठक को लेकर उत्सुकता निश्चित रूप से बढ़ गई है।
उन्होंने कहा, पिछले वित्त वर्ष में ब्याज दर में बढ़ोतरी के बाद एमपीसी ने अप्रैल-जून तिमाही में नीतिगत दर में यथास्थिति बनाए रखी। गर्मी के महीनों में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति के पांच प्रतिशत से कम होने से यह कदम सही साबित हुआ।
अप्रैल में दर में कोई बदलाव न करने से पहले मई 2022 से आरबीआई ने मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए प्रमुख नीतिगत दर रेपो में कुल मिलाकर 2.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी की थी। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने हाल ही में ब्याज दर को 0.25 प्रतिशत अंक बढ़ाकर 5.25-5.5 प्रतिशत कर दिया, जिससे यह कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई। यूरोपीय सेंट्रल बैंक ने भी ब्याज दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की है। इससे इसकी मुख्य दर 3.75 प्रतिशत हो गई है।
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