केजीएमयू : गर्भाशय कैंसर से पीड़ित मरीजों को राहत दिलायेगी सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी
लखनऊ, अमृत विचार। गर्भाशय कैंसर से पीड़ित महिलाओं को बड़ी सर्जरी के दौरान होने वाले कॉम्प्लिकेशन से राहत मिल सकेगी । इसके लिए सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी तकनीक का इस्तेमाल किया जायेगा। यह जानकारी केजीएमयू स्थित प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की प्रो.निशा सिंह ने शनिवार को कलाम सेंटर में आयोजित कार्यक्रम के दौरान दी। वह एसोसिएशन ऑफ गायनी ऑन्कोलॉजिस्ट के यूपी स्टेट चैप्टर के 10वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं।
सम्मेलन की आयोजन सचिव प्रो.निशा सिंह ने बताया कि सेंटिनल लिम्फ नोड बायोप्सी तकनीक के जरिये कैंसर का फैलाव जिस टिश्यू से शुरू हुआ होगा, उसकी पहचान आसानी से हो सकेगी। साथ ही बड़ी सर्जरी के दौरान होने वाले कॉम्प्लिकेशन से छुटकारा भी मिलेगा। मौजूदा समय में कई लिम्फ नोड निकाल कर जांच की जाती है। जिससे सर्जरी के दौरान कॉम्पिलकेशन अधिक होते हैं। उन्होंने बताया कि हम कोशिश कर रहे हैं कि जल्द ही इस तकनीक से गर्भाशय कैंसर से पीड़ित महिलाओं की जांच शुरू कर दी जाये। इसके लिए आवश्यक उपकरण मंगाये जाने की तैयारी हो रही है।
वहीं इस अवसर पर दिल्ली से आई डॉ. रूपिन्दर सेखों ने बताया कि ओबेरियन कैंसर से पीड़ित मरीजों में सर्जरी के दौरान हाइपेक ( HIPEC) तकनीक का इस्तेमाल कर एबडामिनल में हीटेड कीमोथेरेपी (गर्म इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी) डालने से मरीज ज्यादा समय तक सवाईव करता है। इस तकनीक के इस्तेमाल से बीमारी वापस आने के चांस भी कम होते हैं। इस अवसर पर प्रोफेसर एसपी जैसवार, डॉ. रानू, डॉ. सुजाता देव, डॉ. रेखा सचान, डॉ. रेनू समेत कई चिकित्सक मौजूद रहे। वहीं कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि के तौर पर कुलपति ले.ज.डॉ.बिपिन पुरी उपस्थित रहे।
बता दें कि एसोसिएशन ऑफ गायनी ऑन्कोलॉजिस्ट के यूपी स्टेट चैप्टर के 10 वें वार्षिक सम्मेलन में दिल्ली, जयपुर, ऋषिकेश, आगरा, कानपुर, झाँसी और गोरखपुर से आये करीब 150 डॉक्टरों ने हिस्सा लिया। साथ ही कैंसर के इलाज से संबंधित नई तकनीकों पर चर्चा की।
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