बरेली: रुहेलखंड में सामाजिक शिक्षा की आधारशिला रखेगा रुविवि

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बरेली,अमृत विचार। गुरुकुल शिक्षा पद्धति, तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों के समय भारत विश्वगुरु रहा। एक बार फिर से भारत को विश्व का शैक्षिक हब बनाना है। इसके लिए हमारे पास महान परंपरा का अनुभव भी है। पिछले पांच वर्षों से नई नीति तैयार की जा रही है, जिसमें 15 लाख लोगों व करीब 2.50 लाख …

बरेली,अमृत विचार। गुरुकुल शिक्षा पद्धति, तक्षशिला और नालंदा विश्वविद्यालयों के समय भारत विश्वगुरु रहा। एक बार फिर से भारत को विश्व का शैक्षिक हब बनाना है। इसके लिए हमारे पास महान परंपरा का अनुभव भी है। पिछले पांच वर्षों से नई नीति तैयार की जा रही है, जिसमें 15 लाख लोगों व करीब 2.50 लाख ग्राम पंचायतों से संवाद किया गया। अब नई नीति तैयार है, जिसे प्रभावी तरीके से लागू करना है।

सोमवार को ‘नई शिक्षा नीति’ पर सभी राज्यों के राज्यपाल, केंद्रीय और राज्य विश्वविद्यालयों के कुलपतियों के साथ वर्चुअल संवाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बातें कहीं। इसमें राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल निशंक, नई शिक्षा नीति के अध्यक्ष, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, कुलपति प्रोफेसर कृष्णपाल सिंह आदि रहे।

नई नीति लागू करने के लिए सभी राज्यों और विश्वविद्यालयों से टास्क फोर्स गठित करने को कहा गया है। यूपी में राज्य स्तर पर टास्क फोर्स गठित भी हो चुकी है। महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय भी अपनी टास्क फोर्स गठित करने की तैयारी में है।

कुलपति प्रोफेसर कृष्णपाल सिंह बताते हैं कि रुहेलखंड में सोशल एजुकेशन पॉलिसी (सामाजिक शिक्षा नीति) तैयार की जाएगी, जो टास्क फोर्स बनेगी। उसमें समाज के सभी क्षेत्र-वर्गों का प्रतिनिधित्व होगा। मसलन, निजी-राजकीय और एडेड कॉलेज, उद्योग, शिक्षक-छात्र और समाज के अन्य बुद्धिजीवी वर्ग को शामिल किया जाएगा। संवाद में परीक्षा नियंत्रक संजीव कुमार सिंह, वित्त अधिकारी आदि शामिल रहे।

10 साल आगे का बनाएंगे विजन
नई शिक्षा नीति पर हुए संवाद में विश्वविद्यालयों के कुलपतियों से विजन 2030 भी तैयार करने को कहा गया है। यानी अगले दस सालों में वे अकादमिक क्षेत्र में क्या और कैसे सुधार लाएंगे। उसका प्रारूप बनाकर दें।

अकादमिक बैंक बनाएंगे विवि
विश्वविद्यालय अपने यहां एक अकादमिक क्रेडिट कोर्स का बैंक तैयार करेंगे, जो ऑनलाइन किए जाएंगे। कोर्स तैयार करने में रोजगार की संभावनाओं पर विशेष ध्यान देना होगा। मसलन जो कोर्स बनाया गया है, उससे संबंधित क्षेत्र या अन्य जगह रोजगार की क्या संभावनाएं हैं।

बीच में पढ़ाई छोड़ने पर मिलेगा प्रमाण पत्र
नई शिक्षा व्यवस्था एक क्रांतिकर कदम मानी जा रही है। इसमें अगर कोई छात्र बीच में पढ़ाई छोड़ देता है, तब भी उसे प्रमाण पत्र मिलेगा। मसलन, बीए प्रथम वर्ष की परीक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने वाले को प्रमाण पत्र, द्वितीय वर्ष के बाद डिप्लोमा और तीन वर्ष के बाद डिग्री मिलेगी। वहीं चौथे वर्ष की पढ़ाई के बाद शोध की उपाधि दी जाएगी। कुलपति प्रोफेसर कृष्णपाल सिंह के मुताबिक अब बहु-विषयक शिक्षा व्यवस्था होगी। इसके कई लाभ हैं। उन्होंने कहा कि नई नीति को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा।

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