बहराइच: प्रधानमंत्री तो चुन सकते हैं, लेकिन प्रधान नहीं, ग्रामीणों ने डीएम कार्यालय पर किया प्रदर्शन, जानें वजह
बहराइच, अमृत विचार। जिले के वन टंडिया गांव महबूबनगर के सैकड़ों ग्रामीण सोमवार को डीएम कार्यालय पहुंचे। सभी ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया ग्रामीणों का कहना है कि राजस्व गांव ना होने से गांव के लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिलता है। इतना ही नहीं ग्रामीणों को परिवार रजिस्टर का नकल भी नहीं दिया जा रहा है।
डीएम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए अधिकारियों को हल निकालने के निर्देश दिए। मोतीपुर तहसील अंतर्गत वनटांगिया ग्राम महबूबनगर के सैकड़ों ग्रामीण सोमवार को डीएम कार्यालय पहुंचे। सभी ने नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया।जिलाधिकारी मोनिका रानी से मुलाकात कर बताया कि उनका गांव वन टांगिया ग्राम है जो 1922 में वानिकी कार्यों के लिए वन विभाग द्वारा बसाया गया था।

देश आजाद हो जाने के बाद भी अभी तक उनका गांव राजस्व ग्राम में परिवर्तित नहीं हो सका है। इस नाते सुविधाओं और योजनाओं को गांव में लागू नहीं किया जा रहा है। इस ग्राम में लोगों को परिवार रजिस्टर की नकल भी जारी नहीं हो पाती है और न ही उन्हें पंचायत चुनाव में वोट देने के लिए अधिकृत किया गया है। गांव वालों ने कहा कि वह लोग प्रधानमंत्री को चुन सकते हैं, लेकिन प्रधान नहीं। केवल लोकसभा और विधानसभा में ही मतदान कर सकते हैं।
अभी हाल ही में पेयजल मिशन द्वारा लगाए जाने वाले पाइप लाइन को वनटांगिया महबूबनगर में इसलिए नहीं लगाया गया क्योंकि उनका गांव राजस्व ग्राम नहीं है। पिछले दो साल से लोग परिवार रजिस्टर की मांग के लिए शासन में ग्राम पंचायत अधिकारी से लेकर निदेशक, पंचायती राज, उत्तर प्रदेश के कार्यालय तक चक्कर काट चुके हैं, लेकिन परिवार रजिस्टर भी नहीं प्राप्त कर सके हैं।
वन अधिकारों के लिए पिछले 18 वर्ष संघर्षरत सामाजिक कार्यकर्ता जंग हिंदुस्तानी ने बताया कि वर्ष 2019 में वनग्राम महबूबनगर को राजस्व ग्राम किए जाने का प्रस्ताव जिला स्तर से शासन को भेजा जा चुका है, लेकिन जिला स्तर से लचर पैरवी के कारण अभी तक उस पर कोई कार्यवाही नहीं हुई है। जिलाधिकारी मोनिका रानी ने आश्वासन दिया है कि शीघ्र ही वनटांगिया ग्राम को राजस्व ग्राम का दर्जा दिलाया जाएगा।इस अवसर पर रामनिवास, रामचंद्र,अमिरका प्रसाद , गणेश गिरी सहित सैकड़ों महिला-पुरुष मौजूद रहे।
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