Kanpur: विधानसभा में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने जेके कैंसर की बदहाली का उठाया मुद्दा, बोले- दवाओं का भी रहता टोटा
विधानसभा में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने जेके कैंसर की बदहाली का उठाया मुद्दा।
विधानसभा में सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने जेके कैंसर की बदहाली का मुद्दा उठाया। बजट न होने की वजह से बंद पड़ी करोड़ों की मशीनें व स्टाफ की भी कमी रहती है।
कानपुर, अमृत विचार। रावतपुर स्थित जेके कैंसर संस्थान बजट के अभाव में बदहाली से जूझ रहा है। यहां पर करोड़ों रुपये से स्थापित की गई मशीनें करीब नौ माह से बंद हैं। साथ ही दवाओं का भी टोटा है। कैंसर अस्पताल का लाभ मरीजों को मिलता रहे, इसलिए सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने विधानसभा में जेके कैंसर संस्थान की दुर्दशा का मुद्दा उठाया, जिस पर उप मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री ने जल्दी ठोस कार्रवाई का आश्वासन दिया।
रावतपुर स्थित जेके कैंसर संस्थान में एक समय मरीजों की भीड़ अधिक होने पर बेडों की संख्या कम पड़ जाती थी। तब संस्थान में उत्तर प्रदेश, दिल्ली, महाराष्ट्र व बिहार के कई जिलों से मरीज कैंसर का इलाज कराने आते थे, लेकिन वर्तमान में जेके कैंसर संस्थान खुद बीमार हालत में है। इस संबंध में आर्य नगर सपा विधायक अमिताभ बाजपेई ने विधानसभा में याचिका दायर की।
जारी पत्र में कहा कि सरकार जहां चिकित्सा सेवाओं के विस्तार व आधुनिकारण पर जोर दे रही है, वहीं राजकीय जेके कैंसर संस्थान से मरीज बैरंग लौट रहे है। यहां करीब चार करोड़ की मशीनें रखरखाव के अभाव में कंडम होने की करीब हैं। संस्थान को दो साल से बजट नहीं मिला है।
कैंसर के मरीजों के इलाज में उपयोगी एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्सरे, कोबाल्ट, ब्रेकी थेरेपी मशीन खराब हैं। सिर्फ दो रेडियोथेरेपी मशीन ही काम कर रही हैं। विधायक अमिताभ बाजपेई के मुताबिक सदन ने याचिका को स्वीकार कर लिया है। इस पर आगे जल्द बहस होगी। उप मुख्यमंत्री व प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने ठोक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है।
संस्थान में स्टाफ की भी है कमी
शिकायतकर्ता काकादेव निवासी नीरज सिंह कहना है कि साल 2022-23 व वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजट नहीं मिला। जबकि हर साल शासन से एक करोड़ रुपये मिलता हैं। कैंसर के मरीजों को जांच के लिए दूसरे अस्पताल रेफर किए जा रहे है। इसके साथ ही 106 बेड की क्षमता वाले संस्थान में 20 नर्सों के पद है, जिनमें से सात नर्सें तैनात है। मानक के तहत 60 नर्सों की जरूरत हैं। ग्रेड तीन के 34 पदों मं से 18 व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी के 64 पदों में से केवल 28 कर्मी ही तैनात है। संस्थान के निदेशक डॉ. एसएन प्रसाद का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा महानिदेशक को पत्र भेजकर बजट की मांग की गई है। बजट आने पर मशीने चालू कराई जाएंगी।
