मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि के ट्रस्टियों ने 1968 के समझौते को रद्द करने के लिए दायर किया वाद
मथुरा। श्रीकृष्ण जन्मभूमि ईदगाह विवाद से संबंधित एक नया वाद सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में दायर किया गया है। यह वाद अब तक दायर सभी वादों से अलग है।
डीजीसी सिविल संजय गौड के अनुसार अब तक दायर किये गए वाद में जहां श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट को प्रतिवादी बनाया गया था वहीं नये वाद में श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट ने ही एक वाद दायर कर श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ और ईदगाह कमेटी के बीच 1968 में हुए समझौते को रद्द करने की प्रार्थना की गई है। इस वाद में श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संघ , श्रीकृण जन्मभूमि ट्रस्ट द्वारा बनाई गई एक सोसाइटी है जिसे ट्रस्ट के रोजाना के कार्यों को देखने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस वाद के अधिवक्ता महेश चन्द्र चतुर्वेदी ने बताया कि वाद मे अदालत से प्रार्थना की गई है कि 13.37 एकड भूमि जिसका पुराना खाता नम्बर 291 और नया खाता नम्बर 255 है और जो कटराकेशवदेव पर स्थित है उसके स्वामी भगवान बालकृष्ण केशवदेव विराजमान गर्भगृह एवं श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट हैं।
उन्होंने बताया कि वाद में 1968 के समझौते एवं सन 1974 की तहरीर को भी रद्द करने की प्रार्थना की गई है साथ में ऐसा आदेश भी देने की प्रार्थना की गई है कि 1968 का समझौता इस मुकदमे के वादीगण पर लागू नही होता है। अधिवक्ता ने बताया कि अदालत से वादकारियों के पक्ष में एवं प्रथम प्रतिवादियों के खिलाफ निेषेधाज्ञा जारी करने तथा उनसे अनधिकृत एवं गैर कानूनी निर्माण को जो कि केशवदेव मन्दिर की भूमि पर खड़ा किया गया है] को हटाने के लिए आदेश देने का अनुरोध किया गया है।
अदालत से प्रार्थना की गई है कि वह प्रतिवादी नम्बर एक , उनके कर्मचारियों, उनके सहयोगियों, एटार्नी तथा हर व्यक्ति जो उनके अधीन काम करता है ,वह कटरा केशवदेव मन्दिर की 13.37 एकड़ भूमि में प्रवेश न करे। वाद को शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्मभूमि ट्रस्ट के ट्रस्टी विनोद कुमार बिन्दल द्वारा भगवान बालकृष्ण केशवदेव विराजमान गर्भगृह के सेवायत एवं अगले दोस्त की हैसियत से दायर किया गया है तथा इस वाद में दूसरे ट्रस्टी ओम प्रकाश सिंघल भी वादी हैं। वाद में कथित ईदगाह ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी एवं श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान को प्रतिवादी बनाया गया है।
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