विभाजन के दौरान मारे गये लोगों को नमन ही विभाजन विभीषिका दिवस का उद्देश्य: विनोद सोनकर

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Edited By Amrit Vichar
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कौशांबी। उत्तर प्रदेश के कौशांबी में विभाजन विभीषिका दिवस पर आज आयोजित संगोष्ठी में सांसद विनोद सोनकर ने कहा कि विभाजन के दौरान हुए नरसंहार में मारे गये लोगों को याद करते हुए नमन ही इस दिन के आयोजन का मुख्य उद्देश्य है। जिला कलेक्ट्रेट परिसर के सम्राट उदयन सभागार में आज विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में सांसद विनोद सोनकर ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि दुनियॉ का सबसे बड़ा विभाजन एवं त्रासदी, उस काल खण्ड का अगर कोई था, तो वह भारत का विभाजन था, जिसके कारण 02 करोड़ से ज्यादा लोग अपने मातृभूमि छोड़कर विस्थापित के रूप में रहने के लिए मजबूर हुए। 6 लाख से ज्यादा लोगों का नरसंहार हुआ, माताओं एवं बहनों की अस्मिता को लूटा गया।

उन्होंने प्रधानमंत्री को धन्यवाद देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने देश के संज्ञान में लाया या देश को याद दिलाया कि आजादी के एक दिन पूर्व 14 अगस्त को किस तरह का नरसंहार हुआ था। विभाजन विभीषिका मनाने का मूल उद्देश्य-जिन लोगों ने अपने प्राणों की आहूति दी तथा जिन लोगों का नरसंहार हुआ, उन्हें याद करना व नमन करना हैं। विस्थापितों ने जो पीड़ा झेली, उनकी पीड़ा को याद कर सीखने का दिन है। ऐसी त्रासदी देश में दुबारा देखने को न मिलें, देश में रहने वाला हर एक नागरिक इस त्रासदी से परचित हो तथा उन्हें भविष्य में ऐसी त्रासदी झेलनी न पड़ें।

सांसद ने कहा कि 14 अगस्त 1947 को 02 देश बनें, भारत और पाकिस्तान, लेकिन पाकिस्तान का निर्माण तुष्टिकरण एवं नफरत के आधार पर हुआ था और उसी का परिणाम था कि 1971 में पाकिस्तान का बॅटवारा हुआ तथा बांग्लादेश अस्तित्व में आया। उन्होंने कहा “इस घटना से हमेंं सीखना व समझना चाहिए कि एक बार नफरत का बीज बोया गया तो उसका कोई अन्त नहीं है। वर्तमान समय में पाकिस्तान में जो हालात हैं, वो दिन दूर नहीं, जब पाकिस्तान का एक और बॅटवारा, पाकिस्तान को देखना पड़ेगा, बलूचिस्तान आज उसी नफरत के बीज में जी रहा है। इन इतिहास की घटनाओं से हमें सीखने की जरूरत है। हमें समाज एवं परिवार में भाईचारा कैसे बना रहें, इसकी चिन्तन करने की आवश्यकता है।”

उन्होंने सभी से आवाह्न किया कि 14 अगस्त की घटना को याद करते हुए 14 अगस्त की सायं को मौन जूलूस प्रत्येक गांव में निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि सम्पूर्ण मानव जाति के इतिहास में इस प्रकार की विभीषिका एवं त्रासदी कहीं पर भी पढने, सुनने एवं देखने को नहीं मिली है। उन्होंने कहा कि 15 अगस्त को हम आजादी का जश्न मनाते हैं। 14 अगस्त की सायं को मौन जूलूस का भी आयोजन करना चाहिए तथा लोगों को जागरूक करना चाहिए ताकि देश का फिर से विभाजन न होने पायें।

उन्हाेंने कहा कि आज भी समाज में ऐसे विघटनकारी ताकतें, विघटनकारी लोग मौजूद हैं, जो देश की सभ्यता, संस्कृति, देश की तरक्की व खुशहाली एवं गॉव की समृद्धि को देख नहीं सकतें। जिसका जो स्वभाव होता है, वह अपना स्वभाव नहीं छोड़ सकता। बिच्छू डंक मारना नहीं छोड़ सकता, साप का स्वभाव है डसना, वह डसने के बिना नहीं रह सकता एवं मोर का स्वभाव है नृत्य करना, वह नृत्य करेंगी। समाज में जो असामाजिक लोग हैं, ऐसे लोगों से सावधान रहने की जरूरत है।
उन्हांने कहा कि जब देश 2047 में आजादी का 100वां वर्ष मना रहा हो तो, आज से इस 25 वर्ष की अवधि में हम सबको अपने अधिकारों से ज्यादा अपने कर्तव्यों पर चिन्तन करने की जरूरत है, जिस दिन देश का बच्चा-बच्चा अपने कर्तव्यों का निर्वाह कर लेगा, उस दिन इस देश को विश्व गुरू बनने तथा इस देश को वैभवशाली बनने से कोई रोक नहीं सकता।

जिलाधिकारी सुजीत कुमार ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि शासन द्वारा 14 अगस्त को विभाजन विभिषिका के रूप में मनाये जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे आमजन को विभाजन के दौरान लोगों द्वारा सही गयी यातना, पलायन एवं वेदना के विषय में बताया जा सकें। उन्होंने कहा कि विभाजन विभिषिका दुर्भाग्यपूर्ण घटना थी, देश का विभाजन किसी विभिषिका से कम नहीं था। भारत के लाखों लोगों ने बलिदान देकर आजादी प्राप्त की थी।

ऐसे समय पर देश का दो टुकडों में बंट जाने का दर्द आज भी लाखों परिवारों में एक गहरे जख्म की तरह घर कर गया है।
उन्होंने कहा कि विभाजन विभिषिका स्मृति दिवस हमें न सिर्फ भेद-भाव, वैमनस्य एवं दुर्भावना को खत्म करने की याद दिलायेगा,बल्कि इससे एकता, सामाजिक सद्भाव और मानव सशक्तिकरण की प्रेरणा मिलेंगी। इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक बृजेश कुमार श्रीवास्तव एवं मुख्य विकास अधिकारी डॉ0 रवि किशोर त्रिवेदी ने भी अपने विचार व्यक्त कियें।

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