बरेली: इंस्टाग्राम-यूट्यूब पर अश्लील और हिंसक फिल्में देख बाली उम्र में बन गए बंदी
काउंसिलिंग करने पर सामने आई बाल संप्रेक्षण गृह में बंद ज्यादातर किशोरों के अपराधी बनने के पीछे यही कहानी, 100 के करीब किशोर बंदी हैं बाल संप्रेक्षण गृह में, 30 के अपराधों के पीछे सोशल मीडिया और फिल्में
अनुपम सिंह, बरेली, अमृत विचार : हिंसक फिल्में और सोशल मीडिया पर छाई अश्लीलता बच्चों को अपराधी बना रही है। बरेली के बाल संप्रेक्षण गृह में सजा काट रहे सौ से ज्यादा बाल और किशोर अपराधियों की काउंसिलिंग के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे साफ इशारा कर रहे हैं कि पैसा कमाने के लिए किस कदर अपरिपक्व मन में जहर घोलकर उसे अपराध और भटकाव के रास्ते पर ले जाया जा रहा है।
इनमें ज्यादातर बाल अपराधियों की कहानी उन अभिभावकों के लिए खतरे की घंटी है, जो अपने बच्चों के हाथों में मोबाइल फोन थमाकर बेखबर हो गए हैं। बाल संप्रेक्षण गृह में कुल मिलाकर सौ से ज्यादा किशोर बंद हैं जिनकी काउंसिलिंग में 30 किशोरों को यहां तक पहुंचाने के लिए फिल्मों और सोशल मीडिया की भूमिका सामने आई है।
काउंसिलिंग के दौरान उनसे अपराध करने की वजह, अपराध करने की सोच कैसे पैदा हुई जैसे कई सवाल पूछे गए थे, इस पर कुछ ने जवाब दिया कि वे अपनी गर्लफ्रेंड के खर्च पूरे करने के लिए अपराध करने लगे, कुछ ने बताया कि वह फिल्मों के हीरो जैसा बनना चाहते थे। ज्यादातर किशोर अपराधी चोरी और दुष्कर्म या छेड़खानी जैसे अपराध में ही पकड़े जाने के बाद बाल संप्रेक्षण गृह भेजे गए हैं। कुछ ऐसे भी हैं जिन्होंने दोस्तों के कहने पर अपराध किया और पकड़े गए।
केस-1
दक्षिण की हिंसक फिल्में देखने के शौक ने 15 साल के किशोर को बाल संप्रेक्षण गृह पहुंचा दिया। पिछले महीने काउंसिलिंग के दौरान उसने बताया कि उसने अपने स्कूल में पढ़ने वाली कई छात्राओं से प्रेम संबंध बना लिए थे। फिल्म में उसने हीरो को गर्लफ्रेंड के खर्च पूरे करने के लिए चोरी करते देखा था। उसने भी अपनी प्रेमिका के लिए गिफ्ट खरीदने को चोरी की तो पकड़ा गया।
केस-2
बदायूं के एक 16 साल के किशोर ने काउंसिलिंग में बताया कि काफी समय पहले यूट्यूब पर एक फिल्म देखी थी, जिसमें छात्र ने अपने खर्च पूरे करने के लिए चोरी की थी। किशोर के अनुसार उसने इसके बाद स्कूल के ही कई दोस्तों के साथ चोरी करने का प्लान बनाया। चोरी करने पहुंचे तो बाकी दोस्त तो भाग निकले लेकिन वह और उसका एक दोस्त रंगे हाथ पकड़ लिए गए।
जुर्म नहीं नादानी हुई थी, फिर भी काटनी पड़ रही है सजा: बाल संप्रेक्षण गृह में कई किशोर बंदी ऐसे भी हैं जिन्होंने काउंसिलिंग के दौरान खुद को बेगुनाह बताते हुए कहा कि जिस जुर्म में उन्हें वहां भेजा गया है, वह उन्होंने किया ही नहीं। एक किशोर बंदी ने बताया कि उसके पड़ोस की ही एक किशोरी से प्रेम संबंध थे।
एक दिन उसे लड़की के घरवालों ने पकड़ लिया। उसके बाद उसके परिवार पर शादी करने का दबाव बनाया। उसके परिवार वालों ने उसे नाबालिग बताते हुए शादी करने से इन्कार किया तो उन्होंने उसके खिलाफ दुष्कर्म का केस दर्ज करा दिया।
अभिभावकों के लिए ये सावधानी जरूरी:
- -किशोरों को मोबाइल फोन का ज्यादा इस्तेमाल नहीं करने देना चाहिए।
- -उन्हें अश्लील और हिंसक वीडियो या फिल्में नहीं देखने देनी चाहिए।
- -अपराध करने या गंदे विचार आने पर अभिभावकों काे बताएं।
- -मोबाइल फोन के इस्तेमाल के दौरान अभिभावकों को बच्चों पर नजर रखनी चाहिए।
- -मोबाइल फोन इस्तेमाल करने वाले बच्चों के में बदलाव दिखे तो सतर्क हो जाएं।
मोबाइल फोन से शुरू होता है बच्चों को अपराध की ओर ले जाने वाला रास्ता: जिला अस्पताल स्थित मन कक्ष के प्रभारी डॉ. आशीष का कहना है कि अक्सर पोर्न या सोशल मीडिया पर आपराधिक बेव सीरीज देखने वाले बच्चों के दिमाग में नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। इसका कारण डोपामीन नाम का हारमोन होता है जिसका स्तर घटने और बढ़ने से बच्चे ऐसी फिल्में देखने के उत्सुक होते हैं जो उन्हें अपराध की ओर ले जाती हैं।
मन कक्ष में गेमिंग के तमाम मामले आते हैं। बच्चे अगर अकेले में बैठकर लगातार मोबाइल फोन चला रहे हैं तो परिवार के लोगों को ध्यान देना चाहिए। अगर वे मना करने पर भी न मानें तो उनकी मनोचिकित्सक से काउंसिलिंग करानी चाहिए।
बाल संप्रेक्षण गृह में अधिकतर किशोर बंदियों ने काउंसिलिंग के दौरान अपराध न करने की बात कही। कुछ ने स्वीकार किया कि अश्लील और हिंसक फिल्म देखने की वजह से उनके मन में भी अपराध करने का ख्याल आया। अभिभावकों को बच्चों पर नजर रखने की जरूरत है। - मोनिका राणा, जिला प्रोबेशन अधिकारी
