लखनऊ: कागजों में सिमटे नगर निगम के ट्रिपल आर सेंटर, दयानिधान पार्क से मंत्री ने की थी शुरुआत

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Edited By Amrit Vichar
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लाखों खर्च कर सभी 110 वार्डों में बनाए गए सेंटर से नगरवासियों को नहीं मिला कोई फायदा

लखनऊ, अमृत विचार। नगर निगम के सभी 110 वार्डों में बनाए गए ट्रिपल आर सेंटर (रिडयूस, रीयूज, रीसाइकिल) में अनुपयोगी चीजों को उपयोगी बनाकर जरूरतमंदों को वितरण करने की पहल कागजों तक सिमट कर रह गई। ये ट्रिपल आर सेंटर महज शो पीस बनकर रह गए। सेंटर के बाहर नगर निगम ने पेंटिंग बनवा दी लेकिन अंदर एक टेबल लगाकर छोड़ दी है। यहां अनुपयोगी चीजें जैसे, कॉपी-किताबें, पुराने जूते, कपड़े आदि लोग छोड़ गए लेकिन आज भी ऐसे ही पड़े हैं।

ट्रिपल आर सेंटर क्या हैं कर्मचारियों को तक पता नहीं। इन सेंटरों पर आने वाले जरूरतमंद लोगों को कर्मचारी जानकारी तक नहीं दे पा रहे हैं उपयोगी वस्तुएं देना तो छोड़ दीजिए। ट्रिपल आर सेंटर पर नगर निगम के लाखों रुपये बर्बाद हो गए लेकिन नतीजा कोई नहीं निकला। ऐसे में अनुपयोगी से उपयोगी चीजें तब बनेंगी जब ट्रिपल आर सेंटर धरातल पर शुरू किए जाएंगे।

दयानिधान पार्क से मंत्री ने की थी शुरुआत
नगर विकास मंत्री एके शर्मा ने 21 मई को लालबाग के दयानिधान पार्क में ''मेरी लाइफ, मेरा स्वच्छ शहर'' अभियान के तहत ''ना थ्रो, ना थ्रो'' आरआरआर सेंटर की शुरुआत की थी। लखनऊ समेत यूपी के 11 नगर निगम में ट्रिपल आर सेंटर बनाये जाने थे। इनमें घर की अनुपयोगी चीजों को उपयोगी बनाकर जरूरतमंद लोगों को वितरित किया जाना था।

सेंटर पर बनाने थे शूज बैंक, थैला, बुक और बर्तन बैंक
नगर निगम द्वारा सभी 110 वार्डों में ट्रिपल आर सेंटर बनाए गए। यहां शू बैंक, थैला बैंक, बुक बैंक, बर्तन बैंक, कपड़ा बैंक और गुठली बैंक बनने थे। जिसमें अनुपयोगी वस्तुओं जैसे कपड़े, जूते, खिलौने और किताबों को उपयोगी बनाना था। इन वस्तुओं को दोबारा इस्तेमाल के लिए जरूरतमंदों में वितरण किया जाना था। सेंटरों में अनुपयोगी वस्तुएं तो जमा कीं लेकिन इनको उपयोगी बनाने का काम नहीं हो पाया।

न कर्मचारियों का प्रशिक्षण और न प्रभारी बने
नगर निगम ने सभी 110 वार्डों में ट्रिपल आर सेंटर तो बना दिए लेकिन कर्मचारियों को न तो प्रशिक्षण दिया गया और न प्रभारी बनाए गए। ऐसे में इन सेंटर के बनाने का मकसद कर्मचारियों और शहरवासियों को पता नहीं चला। जोन आठ के तेलीबाग स्थित स्थायी रैन बसेरे में तैनात सेंटर के केयर टेकर को पता ही नहीं क्या करना है। सेंटर के अंदर रखी गयी एक टेबल पर इक्का-दुक्का लोग अनुपयोगी चीजें रखकर चले जाते हैं लेकिन उन्हें उपयोगी वस्तुएं नहीं मिल रही हैं।

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