Kanpur Suicide: सहन करने की क्षमता खत्म, लोग उठा रहे आत्मघाती कदम, बच सकते हैं अगर…
कानपुर में लोग आत्मघाती कदम उठा रहे है।
कानपुर में भागमभाग भरी जिंदगी में आजकल लोगों के सहन करने की क्षमता खत्म होती जा रही है। जिससे वह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर है।
कानपुर, अमृत विचार। भागमभाग भरी जिंदगी में आजकल लोगों के सहन करने की क्षमता खत्म होती जा रही है। जिससे वह आत्मघाती कदम उठाने को मजबूर है। तनाव, चिंता, अवसाद में लोग रोजाना फांसी के फंदे पर झूलते नजर आ रहे हैं। लोगों की अनियमित क्रिया ही अब उनके लिए ही मुसीबत पैदा कर रही है।
जिसके चलते लोग परिवार और समाज से दूर होते जा रहे हैं। ऐसे में कई बार वह अकेलेपन का शिकार हो जाते हैं। इस कारण लोग नशे का सहारा ले लेते हैं। कानपुर कमिश्नरेट के अंतर्गत पिछले आठ माह में आत्महत्या करने के मामले आए जो सोचनीय और चिंतनीय है। इससे ऊपर आने के लिए लोगों को अपनी जीनवशैली को बदलकर सामाजिक सक्रियता में बढ़ना होगा।
पुरुष सबसे ज्यादा देते जान
शहर में छोटी से छोटी परेशानी से तंग आकर आत्महत्या करने का सिलसिला थम नहीं रहा है। आठ महीनों के रिकॉर्ड के अनुसार, आत्महत्या करने वालों में 60 प्रतिशत पुरुष हैं, जबकि 40 प्रतिशत महिलाएं हैं। इसमें ज्यादातर 14 से 25 वर्ष तक के युवा और 62 से 70 वर्ष के बुजुर्ग हैं। महिलाओं में भी ज्यादातर 14 से 18 वर्ष उम्र की लड़कियों ने आत्महत्या की है। पोस्टमार्टम के एक आंकड़े के अनुसार इस वर्ष तकरीबन आठ महीनों में चार सैकड़ा से ज्यादा लोग जान दे चुके हैं। वहीं वर्ष 2022 में यही आंकड़ा तीन सौ के आसपास था।
कोरोना की दूसरी लहर के बाद बढ़े मामले
अलग-अलग व्यवसाय से जुड़े हुए लोगों ने बिना किसी ठोस कारण के खुद को मौत के घाट उतारा है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है। कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने आत्महत्या की थी। जान देने का सिलसिला अभी भी जारी है। पोस्टमार्टम के डॉक्टरों के अनुसार कोरोना के बाद आत्महत्या के केस काफी तेजी से देखने को मिले हैं। इस वर्ष तो हर दिन युवक, महिलाएं, व बच्चे आत्महत्या कर रहे हैं।
परिवार को रखना चाहिए ध्यान
डॉक्टरों के अनुसार आत्महत्या का सबसे प्रमुख कारण तनाव, चिंता, अवसाद है। ऐसे में हमें खुद में वह अपने परिवार में यह देखना चाहिए कि कहीं हम व हमारे परिवार का कोई सदस्य, मित्र तनाव, अवसाद या अकेलेपन का शिकार तो नहीं हो रहा है। अगर कोई व्यक्ति गुमसुम रहता है, कम बात करता है, आंखें मिला कर बात नहीं कर पाता, अकेले कमरे में बंद रहता है, भीड़भाड़ की जगह पर जाने से बचता है, तो तुरंत सतर्क हो जाना चाहिए। उनकी समस्याओं को जानकर बातचीत करनी चाहिए। अगर मामला गंभीर लगे तो तत्काल किसी मनोवैज्ञानिक से इस बारे में सलाह लेनी चाहिए।
जान देने के कई बार होते अलग-अलग कारण
लोगों की अनियमित क्रियाएं व भागदौड़ की जिंदगी को लेकर लोगों का जीवन के प्रति मोहभंग हो रहा है। जिसके चलते लोग अलग-अलग तरीकों से घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। मनोवैज्ञानिक डॉक्टर गणेश शंकर के अनुसार आत्महत्या के कई बार अलग-अलग कारण होते हैं। कई बार व्यवसाय में घाटा, पारिवारिक समस्या, प्रेम संबंध में सफल होने के चलते लोग आत्महत्या करते हैं। लेकिन एक व्यक्ति के जीवन में इस तरह की समस्याएं सामान्य है। एक स्वस्थ व्यक्ति इस तरह की समस्याओं में आत्महत्या नहीं कर सकता।
घर वाले ऐसे पहचाने आत्महत्या के लक्षण
- घर में परिजनों से अलग-थलग रहना।
- रात में नींद कम आना या ज्यादा देर तक सोना।
- चिड़चिड़पन होना।
- भूख ज्यादा या कम लगना।
- किसी बात को अधिक देर तक सोचना।
- यौन इच्छाओं में कमी।
- आत्मग्लानि की बात बार-बार कहना।
- मरने की बातें बार-बार कहना।
- शराब या नशे की मात्रा बढ़ा देना।
ये है आत्महत्या की वजह
- मंजिल तक पहुंचने में नाकामी।
- पढ़ाई का तनाव।
- प्यार में धोखा या नाकामी।
- अकेलापन या अपनों की बेरुखी।
- आर्थिक तंगी, घरेलू कलह, घरेलू हिंसा।
- लंबी बीमारी से ऊबकर।
- पारिवारिक बिखराव
बच सकते हैं अगर
आत्महत्या के विचार किसी के भी परिजन के दिमाग में कभी भी आ सकते है, इसके प्रति सजग रहना चाहिए। जहां तक हो सके परिवार के साथ रहें और परिवार को अधिक से अधिक समय दें। दिनचर्या को नियमित बनाएं समय से उठे, सोएं और भोजन करें, नशे से दूर रहें।
आत्महत्या में दिखता तकलीफों का अंत
आत्महत्या करने वाले की मनोस्थिति जीवन और मृत्यु की दुविधा में झूलती रहती है। वह दिल से तो जीना चाहता है, लेकिन उसे अपनी तकलीफों का अंत आत्महत्या में ही दिखता है। इस कारण वह मन के विरुद्ध गलत निर्णय ले बैठता है। ऐसे में परिजन यदि उसकी तकलीफों को समझ लें, और उन्हें बांट लें तो समस्या हल हो सकती है।
मौत को गले लगाने में बाज नहीं आ रहे लोग
शहर में आत्महत्या करने वालों का सिलसिला थम नहीं रहा है। शुक्रवार देर रात कमिश्नरेट के अलग-अलग थानाक्षेत्रों में तीन नौजवान युवकों ने आत्महत्या करके अपने जीवन को समाप्त कर लिया। इससे पहले गुरुवार रात भी तीन लोगों ने फांसी लगाकर जान दे दी थी।
