बरेली: कियोस्क के आवंटन पर मेयर और नगर आयुक्त में तनातनी

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। मेयर उमेश गौतम और नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स के बीच स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बनी कियोस्क (गुमटीनुमा दुकान) के आवंटन पर तनातनी शुरू हो गई है। अब तक स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से चार कियोस्क का आवंटन किया गया है, जिसके लिए एनओसी न लिए जाने पर मेयर ने आपत्ति जताई है। 

मंगलवार को नगर आयुक्त ने स्मार्ट सिटी के तहत बनी कियोस्क को नगर निगम के अधिकार क्षेत्र से बाहर बताते हुए जवाब भेजा तो मेयर ने हाथ के हाथ उसे गैर न्यायोचित बताते हुए खारिज कर दिया। मंगलवार को ही उन्होंने नगर आयुक्त को दोबारा पत्र भेजकर पुनर्विचार कर दोबारा जवाब देने को कहा है।

स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से एलन क्लब मंडी के सामने तीन और बरेली कॉलेज गेट के सामने एक कियोस्क बनवाए गए हैं। चारों कियोस्क शहर के प्रमुख स्थान पर हैं। कहा जा रहा है कि इनका आवंटन मुख्यमंत्री की मिशन शक्ति नारी सुरक्षा और स्वावलंबन के तहत महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य को ध्यान में रखकर किया गया है। स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से इनके आवंटन के लिए चार बार निविदा जारी की गईं जिसमें 19 निविदादाताओं ने हिस्सा लिया।

कियोस्क के आवंटन के लिए कमिश्नर सौम्या अग्रवाल की अध्यक्षता में कमेटी बनी जिसके सामने सभी आवेदकों प्रेजेंटेशन दिया। इसके बाद गाइड लाइन के मुताबिक ज्यादा राजस्व देने वाले समूह को कियोस्क आवंटित किए गए। कियोस्क के आवंटियों में महिला स्वयं सहायता समूह और एनजीओ शामिल हैं और उन्होंने इन कियोस्क में अपने उत्पादों की बिक्री भी शुरू कर दी है। मेयर ने इस आवंटन पर यह कहते हुए आपत्ति जताई है कि आवंटन से पहले नगर निगम बोर्ड और कार्यकारिणी समिति से एनओसी (अनापत्ति प्रमाणपत्र) क्यों नहीं लिया गया।

नगर आयुक्त का जवाब...
कियोस्क का निर्माण और आवंटन बरेली स्मार्ट सिटी कंपनी लिमिटेड के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत हुआ है। स्मार्ट सिटी कंपनी की पत्रावलियां और काम के परीक्षण का अधिकार नगर निगम बोर्ड को नहीं है। इसी कारण बोर्ड से एनओसी लेने की आवश्यकता महसूस नहीं की गई।

मेयर का जवाबी सवाल...
नगर निगम की किसी भूमि पर स्मार्ट सिटी कंपनी को काम करने के लिए बोर्ड की अनुमति लेना आवश्यक ही नहीं अनिवार्य भी है। पहले भी कई प्रोजेक्ट पर अनापत्ति ली गई है। इसलिए यह कहना कि यह नगर निगम बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में नही है, न्यायोचित प्रतीत नहीं होता।

उपसभापति ने लगाए थे लाखों लेने के आरोप
यह रार दरअसल उपसभापति के मेयर उमेश गौतम को 17 अगस्त को लिखे उस पत्र पर शुरू हुई है जिसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि स्मार्ट सिटी के तहत शहर के प्रमुख स्थानों पर बनी दुकानों को लाखों रुपये लेकर एनजीओ को आवंटित कर दिया गया है। इन दुकानों के आवंटन के लिए कार्यकारिणी समिति और नगर निगम बोर्ड से कोई अनापत्ति तक नहीं ली गई। दिलचस्प यह है कि इस मामले में सिर्फ नगर आयुक्त पर उंगली नहीं उठ रही है। कमिश्नर इस प्रोजेक्ट की अध्यक्ष हैं। आवंटन के लिए कमेटी भी उन्हीं की अध्यक्षता में बनी थी।

आशंका: और बढ़ेगी रार
यह रार और जोर पकड़ने की आशंका है। वजह यह है कि स्मार्ट सिटी कंपनी की ओर से मालगोदाम के पास भी ऐसी ही दुकानें बनवाई गई हैं। अर्बन हाट में भी कई प्रोजेक्ट अंतिम चरण में हैं। ये सभी प्रोजेक्ट केंद्र और राज्य सरकार से स्वीकृत प्रोजेक्ट हैं।

ताजा होने लगीं चार साल पुराने पोर्टेबल शॉप प्रकरण की यादें
मेयर उमेश गौतम और नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स के बीच कियोस्क आवंटन को लेकर चल रही तनातनी से चार साल पुराने पोर्टेबल शॉप प्रकरण की यादें ताजा होने लगी हैं। भारी संख्या में ये पोर्टेबल शॉप नॉन वेंडिंग जोन में लगवाकर आवंटित कर दी गई थीं। 

तत्कालीन नगर आयुक्त सैमुअल पॉल एन ने इसे अवैध उगाही का मामला बताते हुए एक पार्षद और व्यापारी नेता पर एफआईआर दर्ज करा दी थी जिसके बाद मेयर उमेश गौतम और तत्कालीन नगर आयुक्त खुलकर आमने-सामने आ गए थे। तत्कालीन डिप्टी मेयर और तमाम पार्षदों ने नगर आयुक्त कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया था। इसके बाद बरेली में रहते पॉल के संबंध मेयर से सामान्य नहीं हो सके थे।

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