सुस्त रवैया
पिछले दिनों से हो रही बारिश से जन जीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। इसका असर पहाड़ी क्षेत्रों पर तो पड़ ही रहा है, मैदानी इलाके भी इससे अछूते नहीं हैं। नदियां उफान पर हैं और गांवों में बाढ़ तथा भू-कटान जैसी स्थिति उत्पन्न हो रही है। वहीं दूसरी ओर शहरी क्षेत्र भी बारिश से जलमग्न हैं।
बारिश के कारण नदियों में बाढ़ आना एक स्वाभाविक बात है, लेकिन बारिश की वजह से शहरों के साथ-साथ महानगरों का भी जलमग्न होना व्यवस्था की खामियों को दर्शाता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश में स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत कई शहरों को पुनर्विकसित किया जा रहा है। यह सही बात है कि शहरीकरण से विकास नए द्वार तो खोलते ही हैं, साथ ही रोजगार को भी बढ़ावा मिलता है।
इस समय प्रदेश में पिछले कई महीनों से शहरों में सीवर डालने का कार्य चल रहा है, लेकिन इस कार्य की रफ्तार इतनी धीमी या लापरवाही से भरी है कि इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ता है। इस समय प्रदेश के कई शहर जगह-जगह सीवर के कारण खुदे पड़े हैं।
यह कहना गलत नहीं होगा कि पूरे शहर के शहर खोद दिए गए हैं। स्थिति यह है कि सड़क पर पड़ी मिट्टी की वजह से रपटन जैसी स्थिति बन जाती है और जिससे आए दिन नागरिक चोटिल हो रहे हैं। यही नहीं, हो रही बारिश और खुदे गड्ढे हादसों का सबब बन रहे हैं। साथ ही इस स्थिति की बजह से नागरिकों को घंटों जाम से भी दो-चार होना पड़ रहा है।
यह बात सही है कि जब परिवर्तन होता है तो कठिनाइयों का भी सामना करना पड़ता है। शहर में हो रहे विकास कार्य से कुछ समय तो दिक्कतें होगी ही,लेकिन जब दिक्कतें विकास कार्यों की वजह से नहीं, बल्कि विकास कार्यों को करा रहे तंत्र की लापरवाही की वजह से उत्पन्न होती हैं तो तंत्र पर सवाल उठना लाजिमी हो जाता है। तंत्र के विकास कार्यों का सुस्त रवैया और अकुशल प्रबंधन परेशानी का सबब रहा है, क्योंकि कहीं-कहीं जल्दबाजी या मानकों की अनदेखी के कारण समस्याएं खड़ी होती हैं।
तंत्र से संबंधित अधिकारियों को इस संबंध में फौरी तौर पर विचार करना होगा जिससे नागरिकों को होने वाली असुविधाओं को दूर किया जा सके। साथ ही सरकार में बैठे नीति नियंताओं को भी समझना होगा कि सिर्फ महानगर का दर्जा देने या स्मार्ट सिटी कर देने भर से ही शहर विकसित नहीं हो जाते हैं, बल्कि संकल्पना को सकार रूप देने के पहले शहर की माली हालत का सुधारा जाना और समय-समय पर उचित मॉनिटिरिंग करके विकास कार्यों को समय से पूरा कराकर, समीक्षा की जानी चाहिए। तभी हम अपने शहरों को विकसित कर पाएंगे।
