अमेरिका में रिसर्च करेंगे आंवला के तन्मय
आंवला(बरेली), अमृत विचार। सोशल मीडिया का प्लेटफार्म अब केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए ही नहीं, मुसीबत में फंसे लोगों के लिए भी मददगार साबित हो रहा है। रामानुजन विश्वविद्यालय दिल्ली के रिसर्च असिस्टेंट आर्य तन्मय गुप्ता ने एक ऐसे सॉफ्टवेयर का मॉडल तैयार किया है जो सोशल मीडिया पर मिली सूचनाओं के आधार पर …
आंवला(बरेली), अमृत विचार। सोशल मीडिया का प्लेटफार्म अब केवल सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए ही नहीं, मुसीबत में फंसे लोगों के लिए भी मददगार साबित हो रहा है। रामानुजन विश्वविद्यालय दिल्ली के रिसर्च असिस्टेंट आर्य तन्मय गुप्ता ने एक ऐसे सॉफ्टवेयर का मॉडल तैयार किया है जो सोशल मीडिया पर मिली सूचनाओं के आधार पर बाढ़ में फंसे लोगों तक शीघ्र मदद पहुंचाने में मददगार साबित हो सकता है।
यही वजह है कि संयुक्त राष्ट्र अमेरिका के मिशगन राजकीय विश्वविद्यालय ने आर्य तन्मय गुप्ता को रिसर्च के लिए बुलाया है। वह अमेरिका के लिए रवाना हो गए हैं। अब वह अपने प्रोजेक्टों पर अमेरिका में रिसर्च करेंगे। वह उनको उन्हे फैलोशिप भी मिलेगी।
तन्मय के दादा व इतिहासकार गिरिराज नन्दन गुप्ता ने बताया कि आर्य तन्मय गुप्ता रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के साथ शोध कार्य कर चुके हैं। यमुना बॉयोडाइवर्सिटी पार्क (संरक्षित वन) के लिए, सॉफ्टवेयर डवलपमेंट व रामानुजन महाविद्यालय की रोबोटिक्स मंडली के साथ ट्रेनिंग दे चुके हैं। समाज सेवा एवं पर्यावरण पर भी काम चुके हैं। भारतीय सूचना प्रौद्यिगिकी संस्थान में वह अपनी सेवाएं भी दे चुके हैं।
तन्मय द्वारा बनाया गया सॉफ्टवेयर सोशल मीडिया पर आने वाली पोस्टों में से एपीआई (एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस) के जरिए सिर्फ ऐसी पोस्ट को अलग किया जा सकता है, जो बाढ़ से जुड़ी हो। साफ्टवेयर के जरिए आसानी से पता लगाया जा सकता है कि बाढ़ की पोस्ट पुरानी है या नई।
अगर पोस्ट पुरानी है तो सॉफ्टवेयर उसे खुद अलग कर देगा। नई पोस्ट की सत्यता की जांच के लिए उस जगह की जियोग्राफिकल पोजीशन ली जाएगी। इसके बाद गूगल मैपिंग के जरिये इस बात की पुष्टी तुरंत की जा सकती है कि बाढ़ का प्रभाव अभी कहां और कितना है। कुछ सेकेंड में ही पता किया जा सकता है कि पानी कितनी तेजी से किस दिशा की ओर बढ़ रहा है, इसी हिसाब से वहां तुरंत मदद पहुंचाने की व्यवस्था की जा सकती है।
इस प्रोजेक्ट को प्रभावी तरीके से जनहित में प्रयोग किए जाने के लिए कॉलेज की तरफ से डिपार्टमेंट ऑफ साइंस एडं टैक्नोलॉजी में प्रपोजल भेजा गया था। आर्य तन्मय गुप्ता का दावा है कि इस प्रोजेक्ट के जरिये आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का प्रयोग करके बिना किसी मोबाइल एप के बाढ़ में फंसें लोगों तक मदद पहुंचाई जा सकेगी। प्रभावित क्षेत्र के लोगों को पहले से सतर्क कर नुकसान को कम किया जा सकेगा।
तन्मय ने बरेली का नाम रोशन किया
आर्य तन्मय गुप्ता आंवला के मूल निवासी है। उनके पिता गोपाल गुप्ता और दादा गिरिराज नन्दन कस्बे में ही रहते हैं। उनकी 12वीं तक की शिक्षा होली फैमिली कॉन्वेंट स्कूल आंवला से और बीटैक (कम्प्यूटर साइन्स) रामानुज महाविद्यालय दिल्ली और एमटैक (कम्प्यूटर साइन्स एंड इन्जीनियरिंग) भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान बड़ौदरा से हुई है।
