बरेली: कोरोना संक्रमण के दौर में जीवनदायी साबित हो रही हाई स्पीड ऑक्सीजन थेरेपी

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बरेली,अमृत विचार। जिले में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, इससे निपटने के लिए हाई फ्लो ऑक्सीजन थेरेपी काफी हद तक कामगार साबित हुई है, इस थेरेपी के जरिए कोरोना संक्रमित को बहुत लाभ मिल रहे हैं। यहीं कारण है कि कोविड अस्पताल में भी इसके द्वारा …

बरेली,अमृत विचार। जिले में कोरोना वायरस से संक्रमित होने वाले लोगों की संख्या लगातार बढ़ रही है। वहीं, इससे निपटने के लिए हाई फ्लो ऑक्सीजन थेरेपी काफी हद तक कामगार साबित हुई है, इस थेरेपी के जरिए कोरोना संक्रमित को बहुत लाभ मिल रहे हैं।

यहीं कारण है कि कोविड अस्पताल में भी इसके द्वारा संक्रमित मरीजों का लगातार इलाज किया जा रहा है। 300 बेड अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. वागीश वैश्य बताते है कि कोरोना संक्रमण से गंभीर रूप से पीड़ीत मरीज के रक्त में ऑक्सीजन लेबल 90 प्रतिशत से कम होने पर हाई फ्लो ऑक्सीजन थेरेपी का प्रयोग किया जाता है।

इन मरीजों को थेरेपी की ज्यादा आवश्यकता इसलिए होती है, क्योकि ऑक्सीजन लेबल कम होने से वायरस का प्रभाव शरीर में तेजी से फैलता है जिससे मरीज की मौत भी हो सकती है।

थेरेपी में मरीज की स्थिति को देखते हुए 10 से 60 लीटर प्रति मिनट ऑक्सीजन प्रदान की जाती है। 300 बेड अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डा. अजमेर सिंह का कहना है कि हाई स्पीड ऑक्सीजन थेरेपी से लगातार संक्रमित मरीज ठीक हो रहे हैं। कोरोना संक्रमितों के लिए यह थेरेपी जीवनदाई साबित हो रही है।

डा. अजमेर सिंह के अनुसार थेरेपी में हाईफ्लो नेजल कैनुला मशीन वातावरण से ऑक्सीजन को मेडिकल आक्सीजन में परिवर्तित कर संक्रमित मरीज के ऑक्सीजन लेबल को बढ़ाता है।

हाई फ्लो नेजल कैनुला मशीनों का होता है इस्तेमाल
कोरोना के गंभीर मरीजों की ऑक्सीजन थेरेपी होती है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने कई हाई फ्लो नेजल कैनुला मशीन भी मंगवाई हैं। हाई फ्लो नेजल कैनुआ मशीनों से गंभीर संक्रमित मरीजों को एक मिनट में 60 लीटर ऑक्सीजन प्रदान कर उनका जीवन बचाया जा सकता है। इससे पहले ऑक्सीजन थेरेपी के इस्तेमाल के लिए वेंटिलेटर का प्रयोग किया जाता था।

इस मशीन में स्वचालित सैनेटाइजर भी है जिससे एक मरीज के प्रयोग के बाद मशीन ऑटो सैनेटाइज भी हो जाती है। डाक्टटर मरीज की स्थिति को देखते हुए मशीन से ऑक्सीजन लेबल निर्धारित करती है। मशीन के प्रयोग के 24-48 घंटे बाद मरीज की सेहत में लाभ देखने को मिलता है।

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