Kanpur: जले मरीजों को करना होगा इंतजार, हैलट में बजट की दरकार, GSVM प्रशासन ने शासन से की मांग

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के हैलट अस्पताल में जले मरीजों के लिए इंतजार के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है।

कानपुर के हैलट अस्पताल में जले मरीजों के लिए इंतजार के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं है। बजट के 53 लाख रुपये नहीं मिलने से निर्माण धीमा चल रहा। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने शासन से मांग की।

कानपुर, अमृत विचार। करीब 50 लाख की आबादी वाले इस महानगर में आग से जले लोगों के इलाज के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं हैं। सरकारी स्तर पर उर्सला अस्पताल में भी सिर्फ आठ बेड के बर्न वार्ड की ही सुविधा हैं। जबकि हैलट अस्पताल में निमार्णाधीन बर्न यूनिट को बजट की दरकार है, ऐसे में अगर कोई अनहोनी होती है तो लोगों को इलाज मिल पाना मुश्किल हो सकता है।

हैलट अस्पताल में शहर के साथ ही आसपास जिलों में आग से जलकर झुलसे लोग इलाज के लिए आते हैं। लेकिन यहां बर्न वार्ड की सुविधा नहीं है। यहां पर करीब चार साल से बर्न यूनिट का निर्माण चल रहा है। हैलट में पहुंचने वाले जले मरीजों को उर्सला अस्पताल भेजा जा रहा है। खास बात यह है कि उर्सला अस्पातल में बर्न वार्ड में भी सिर्फ आठ बेड की ही सुविधा है। संख्या अधिक होने पर मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।

मरीज को हो रही तकलीफ को देखते हुए तीमारदार उनको निजी अस्पताल में ले जाने को विवश हो जाते हैं, जहां इलाज के लिए मोटी रकम चुकानी पड़ती है। ऐसे में अगर हैलट में बन रहे बर्न यूनिट का निर्माण कार्य जल्द पूरा होता है तो आग से जले मरीजों को काफी राहत मिल सकेगी। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रशासन के मुताबिक हैलट अस्पताल में इमरजेंसी के सामने खाली जगह पर बर्न यूनिट का निर्माण चल रहा है, जिसकी लागत करीब 6.75 करोड़ रुपये है।

यह यूनिट 26 बेड की होगी, जिसे बनाने का जिम्मा सरकारी कंपनी सीएडडीएस ने लिया है। कार्य गति नहीं पकड़ पा रहा है। इसके पीछे ठेकेदार समय पर बजट जारी न होने की बात कह रहे है। बर्न यूनिट के लिए शासन से 53 लाख रुपये का बजट मिलना बाकी है। इसके अलावा यहां पर करीब तीन करोड़ रुपये उपकरण भी लगने है। बता दें कि हैलट इमरजेंसी के सामने ही बर्न यूनिट थी, लेकिन नई यूनिट के निर्माण की वजह से यहां झुलसे मरीज भर्ती नहीं किए जा रहे है।

बर्न यूनिट के लिए 53 लाख रुपये का बजट मिलना बाकि है। साथ ही करीब तीन करोड़ रुपये से उपकरण खरीदने है। वहीं,यूनिट को चलाने के लिए मानव संसाधान भी जरूरी है। इस संबंध में शासन को जानकारी दी गई है।- प्रो. संजय काला, प्राचार्य, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज

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