महामारी के बीच फर्जीवाड़ा
अमेरिका के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा संक्रमण वाला देश भारत बन चुका है। कुछ दिन पहले तक ब्राजील हमसे आगे था। लेकिन प्रतिदिन 80-90 हजार नए मामले आने से हमने ब्राजील को भी पछाड़ दिया और एक दिन शायद अमेरिका से भी आगे हो जाएंगे, क्योंकि रोज अमेरिका से तीन गुना ज्यादा मामले भारत …
अमेरिका के बाद दुनिया में सबसे ज्यादा संक्रमण वाला देश भारत बन चुका है। कुछ दिन पहले तक ब्राजील हमसे आगे था। लेकिन प्रतिदिन 80-90 हजार नए मामले आने से हमने ब्राजील को भी पछाड़ दिया और एक दिन शायद अमेरिका से भी आगे हो जाएंगे, क्योंकि रोज अमेरिका से तीन गुना ज्यादा मामले भारत में मिल रहे हैं।
प्रतिदिन होने वाली मौतों के मामले में भारत अब अमेरिका को पीछे कर रहा हैं। गुरुवार को कोविड-19 के 95,735 नए मामले सामने आए, जो अब तक एक दिन में आए सबसे अधिक मामले हैं। पिछले 24 घंटों में संक्रमण से 1,172 मौतें दर्ज की गई हैं, जो एक दिन में होने वाली मौतों की सर्वाधिक संख्या है।
कोरोना महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच फर्जीवाड़ा करने के मामले भी सामने आ रहे हैं । प्रदेश के कई जिलों में बाजार से अधिक कीमत पर पल्स ऑक्सीमीटर व इन्फ्रारेड थर्मामीटर खरीदने की जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी ने एसआइटी का गठन किया है। आरोग्य सेतु ऐप में भी मनमानी देखने को मिली।
2 अप्रैल को केंद्र सरकार ने कोरोना का मुकाबला करने के लिए सार्वजनिक-निजी साझेदारी से विकसित आरोग्य सेतु नामक मोबाइल ऐप की शुरुआत की थी। दावा था कि यह ऐप लोगों को कोरोना वायरस का संक्रमण पकड़ने के जोखिम का आकलन करने में सक्षम करेगा। कुछ सवालों के आधार पर उस व्यक्ति के आसपास मौजूद संक्रमण के खतरे और संभावना का पता लगाने में सहायता करता है, ऐसा कहा गया था। लेकिन इस ऐप से संक्रमण रोकने में कितनी मदद मिल पाई, इसका कोई जवाब सरकार के पास नहीं है।
निजता पर खतरे के बावजूद सरकार के कहने पर करोड़ों लोगों ने इसे डाउनलोड किया। सरकार ने भी इसके प्रचार-प्रसार में साढ़े तीन महीने में करीब 4.15 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। एक आरटीआई के जरिए ये जानकारी हासिल हुई है। सवाल ये है कि करोड़ों का यह तामझाम सरकार ने आखिर किसके लिए किया। आरोग्य सेतु ऐप से न कोरोना का प्रसार रोका जा सका, न लोगों को बीमार होने से। फिर किसके फायदे के लिए यह ऐप बना। क्या इसका जवाब सरकार कभी देगी।
देश में प्रति व्यक्ति चिकित्सकों की उपलब्धता काफी कम है। इसलिए आगे हालात कैसे होंगे, इस बारे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है। अब जरूरत है कि कार्य योजना बनाकर चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जाए। कोविड अस्पतालों में विशेषज्ञों की तैनाती की जाए और लगातार जागरूकता बढ़ाई जाए।
