बरेली: मुठभेड़ में सिपाही की हत्या के मामले में फैसला, दो भाई समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा
फतेहगंज पश्चिमी थाना क्षेत्र की घटना, 16 साल पहले हुई थी बदमाशों की पुलिस से हुई थी मुठभेड़
बरेली, अमृत विचार। 16 साल पहले बदमाशों के साथ हुई मुठभेड़ में सिपाही प्रमेंद्र की गोली लगने से हुई मौत के मामले में स्पेशल जज पीसी एक्ट कोर्ट-1 सुरेश कुमार गुप्ता ने बुधवार को सजा सुनाई। कोर्ट ने फतेहगंज पश्चिमी निवासी दो भाई गुड्डू और अकीना, हिस्ट्रीशीटर इब्राहिम, अकील समेत चार बदमाशों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।
उन पर 65-65 हजार रुपये के जुर्माने के साथ ही आर्म्स एक्ट में इब्राहिम, गुड्डू, अकीना पर 5-5 हजार रुपये अतिरिक्त जुर्माना लगाया गया। वहीं एक आरोपी इन्ना की मौत होने पर उसके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई खत्म कर दी गई थी। जुर्माने से प्राप्त रकम का 50 प्रतिशत मृतक के वारिस को देने का आदेश दिया है।
एडीजीसी क्राइम दिगंबर पटेल के मुताबिक सिपाही निर्दोष कुमार ने फतेहगंज पश्चिमी थाने में मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई थी, जिसके मुताबिक वह 19 जनवरी 2007 को रात 12:30 बजे थाने की ड्यूटी पूरी कर चौकी पर आए थे। करीब 12:45 बजे प्रमेंद्र ने कॉल करके उन्हें बताया कि नखासा बाग में बदमाश हैं। सूचना पर टार्च और लाठी डंडा लेकर मौके पर पहुंचे। जहां से फायरिंग की आवाज आ रही थी। वहां बदमाशों को ललकारने और घेरने का प्रयास किया। खुद को घिरा देखकर बदमाशों ने पुलिस वालों पर जान से मारने की नीयत से फायरिंग की।
कांस्टेबल प्रमेंद्र सिंह व होमगार्ड राजेश ने बदमाशों का मुकाबला कर जवाबी फायरिंग की। कुल 5-6 बदमाश थे। बदमाशों ने बौखला कर प्रमेंद्र सिंह पर कई फायर किए, जिससे वह गंभीर घायल हो गए। इलाज के दौरान प्रमेंद्र की मौत हो गई। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया था। शासकीय अधिवक्ता ने कुल 11 गवाह पेश किए।
फायरिंग में बुरी तरह घायल हो गए थे प्रमेंद्र
सिपाही प्रमेंद्र सिंह (46) मजबूत कदकाठी के थे। वह बदमाशों की फायरिंग में बुरी तरह घायल हो गए थे। उनके सीने के बाएं और दाहिनी तरफ, बाएं कंधे पर गोलियों के घाव थे। सीधे हाथ में कोहनी के ऊपर मांस में छोटे-छोटे छर्रे लगे थे। कुल 7 चोटें थीं।
रबर फैक्ट्री के पास मंदिर के पीछे झाड़ियों में छिपा दिए थे हथियार
बदमाश इतने शातिर थे कि मुठभेड़ के बाद उन्होंने हथियारों को बंद पड़ी रबर फैक्ट्री गेट पर स्थित शिव मंदिर के पीछे पेड़ों और झाडियों में छिपा दिया था। पुलिस ने घटना के बाद 26 फरवरी 2007 को तीन आरोपियों को पकड़ा था, जिसमें इन्ना के पास से एक चाकू, गुड्डू के पास से एक तमंचा व दो कारतूस, अकीना के पास से एक तमंचा और दो कारतूस बरामद किए गए थे।
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