ग्लोबल मिस एशिया इंटरनेशनल 2019 विजेता सिया मेहरोत्रा ने की अमृत विचार की तारीफ, बोली- अपना शहर अपना ही होता है, देखें- फोटोज
ग्लोबल मिस एशिया इंटरनेशनल 2019 विजेता सिया मेहरोत्रा कानपुर आईं।
एड फिल्म की शूटिंग करने ग्लोबल मिस एशिया इंटरनेशनल 2019 विजेता सिया मेहरोत्रा कानपुर आईं। इस दौरान उन्होंने अमृत अखबार की तारीफ की।
कानपुर, अमृत विचार। शहर में जन्मी बेटी, जो आज रितिक रौशन, बोमेन ईरानी, साउथ के ‘केजीएफ’ फिल्म फेम यश और क्रिकेटर हार्दिक पांड्या के साथ कई एड फिल्म में अपने अभिनय का जौहर दिखा चुकी हैं। ग्लोबल मिस एशिया इंटरनेशनल 2019 विजेता सिया मेहरोत्रा अपने शहर कानपुर आईं।

शहर को उनसे बहुत उम्मीदें हैं, इन उम्मीदों की वजह भी है क्योंकि यशराज के साथ उनकी वेब सीरीज ‘मंडला मिस्ट्री’ और धर्मा प्रोडक्शन की ‘कॉल मी बे’ भी जल्द आने वाली हैं। इन दोनो ही प्रोजेक्ट में उनके काम को काफी सराहना मिली है। कई एड फिल्म और वेब सीरीज के साथ बड़े ब्रांड उन्होंने हाल ही में साइन किए हैं। सिया मेहरोत्रा के साथ अमृत विचार संवाददाता राजीव त्रिवेदी ने खास बातचीत की, पेश है कुछ खास अंश…

फिल्मों तक पहुंचने का सफर कैसा रहा?
- मेरा जन्म कानपुर शहर का ही है। यहां के हर्डर्ड स्कूल में मेरी प्रारंभिक शिक्षा हुई। इसके बाद मैंने आगे की पढ़ाई पटना के निफ्टी से की। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान ही मु़झे एक जॉब ऑफर हुई और मै बंगलुरू चली गई। वहां पर मैंने एक एमएनसी में जॉब की। जॉब के बाद मैंने अपनी एक खुद की कंपनी भी शुरू की। कंपनी ने जब सफलता हासिल की तो उसके बाद मुझे लगा कि मैं अपने पैशन को अब फॉलो कर सकती हूं और मैंने एक्टिंग की शुरूआत की।

एक्टिंग का ख्याल मन में कैसे आया?
- मैं जब छोटी थी तभी से परिवार और रिश्तेदार सभी मेरी आंखों की वजह से मुझे ऐश्वर्या राय कहते थे। कहते थे कि तुमको एक दिन ऐश्वर्या राय की तरह बड़ी स्क्रीन पर देखना है। ऐसा बार-बार सुनकर मेरे भी मन में एक्टिंग का ख्याल आया। स्कूल के दिनों से ही मैं थिएटर करने लगी। इसके बाद जब मैंने 2019 में ग्लोबल मिस एशिया इंटरनेशनल का खिताब जीता तब जाकर मैंने एक्टिंग को गंभीरता से लिया। मुझे लगा कि मैं इस फील्ड में भी कुछ बेहतर कर सकती हूं और मै कर रहीं हूं।

कहते हैं छोटे शहर के एक्टर को स्ट्रगल बहुत करना पड़ता है, आपके स्ट्रगल का पैमाना क्या रहा?
- जिसे सब स्ट्रगल कहते हैं उसे मैं सीखने का एक प्रोसेस मानती हूं। मुम्बई में शुरूआती दिनों में मैं एक छोटे से कमरे में रहीं। वहां की गर्मी में 12 से 14 घंटे तक लगातार काम किया। इनमें एक्टिंग क्लासेज, जिम, डायट प्लान, मार्शल आर्ट क्लासेज सब कुछ था, लेकिन सब कुछ सीखने के बाद आज मैं इस मुकाम पर खड़ी हूं। मुझे खुशी है कि मैंने अपने पैशन को फॉलो किया और बहुत कुछ अचीव किया।
पहला ब्रेक कैसे मिला?
- मुझे अपना पहला ब्रेक एक कॉमर्शियल एड फिल्म के जरिए मिला। एक विश्वस्तरीय ब्रांड के लिए यह एक एड था। इस एड में मेरे अपोजिट रितिक रौशन थे। इसके बाद लगातार मेरे पास एड फिल्में आती रहीं। फिलहाल मैं कई एड फिल्म के साथ वेब सीरीज में बिजी हूं। अभी हाल ही में एक नया धार्मिक प्रोजेक्ट साइन किया है। इसमें कैंची धाम के नीम करौली बाबा के जीवन से जुड़े एक गाने में मै एक्टिंग कर रहीं हूं।
ग्रेटर नोएडा में फिल्मसिटी बन रही है इससे यहां कितना लाभ होगा?
- यहां पर बहुत टैलेंट है। कई बार यह टैलेंट बेहतर इंतजाम न होने पर मर जाता है। प्रदेश में फिल्म सिटी होने से सबसे पहले तो युवा टैलेंट को फायदा होगा। इसके अलावा मूलभूत सुविधाएं मिल जाने से फिल्मों की शूटिंग भी आसानी से हो सकेगी। अधिक दौड़भाग भी फिल्म युनिट को नहीं करनी होगी। प्रदेश में कई ऐसी लोकेशन हैं जो मुम्बई से दूरी होने के चलते स्क्रीन पर आने से रह जाती है। फिल्म सिटी होने से ऐसी लाइव लोकेशन भी आसानी से बड़ी स्क्रीन पर आ सकेगी। इससे प्रदेश का पर्यटन भी बढ़ेगा।
आपको लगता है कि ओटीटी पर सेंसरशिप की कैंची की जरूरत है?
- ओटीटी पर उस तरह का कंटेंट है जो आज का दर्शक देखना चाहता है। वह दर्शक समझदार है और उसे मालूम है कि उसे क्या देखना है। ऐसे में मुझे नहीं लगता है कि ओटीटी पर किसी तरह की कैंची की जरूरत है। यह इंडस्ट्री का एक नया स्वरूप है। ओटीटी ने कई ऐसे एक्टर दिए हैं जो आज लाखों दिलों पर राज कर रहे हैं। यहां तक कि अब बड़े पर्दे के अभिनेताओं ने भी ओटीटी की ओर से तेजी से रुख किया है।
