Allahabad High Court: वित्तीय अनियमितताओं के मामले में दोषी पाए गए अधिशासी अभियंता को मिली राहत

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Edited By Amrit Vichar
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प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वित्तीय अनियमितताओं के मामले में दोषी पाए गए तत्कालीन अधिशासी अभियंता (सिविल) नगर निगम, वाराणसी संप्रति नगर निगम, बरेली को राहत देते हुए न्यायालय के अंतिम आदेश तक आक्षेपित आदेश दिनांक 17 अगस्त 2023 पर रोक लगाते हुए विपक्षियों को तीन सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है और याची को पूर्ववत अपना कार्य करने की अनुमति दी है तथा इस अवधि के दौरान उसका वेतन भी विभाग द्वारा देय होगा। 
इसके अलावा याची के खिलाफ चलने वाली विभागीय जांच चलती रहेगी, जिसमें याची का सहयोग अपेक्षित है। उक्त आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर की एकलपीठ ने दिलीप कुमार शुक्ला की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। इसके साथ ही इस आदेश की प्रति निबंधक (अनुपालन) को प्रमुख सचिव (नगर विकास) और नगर आयुक्त, नगर निगम, वाराणसी के पास 24 घंटे के अंदर उपलब्ध कराने का निर्देश दिया है। 

याचिका पर अगली सुनवाई आगामी 25 सितंबर को सुनिश्चित की गई है। मामले के अनुसार जांच के बाद यह पाया गया कि तैनाती अवधि के दौरान निर्माण विभाग से संबंधित प्रकरणों में भुगतान न होने पर विभिन्न फर्मों द्वारा आर्बिट्रेशन वाद दाखिल किया गया था, जिसमें याची से पैरवी करने की अपेक्षा की गई थी जबकि ऐसा न करने पर विभाग को बड़ी क्षति हुई। इस पर कोर्ट ने कहा कि अपील दाखिल करने का दायित्व अधिशासी अभियंता का नहीं बल्कि नगर आयुक्त का है। 

मुख्य रूप से कोर्ट ने यह भी कहा कि नगर निगम के मुख्य अभियंता और अकाउंट ऑफिसर के साथ-साथ अन्य अधिकारियों को भी कानून के बारे में जानकारी नहीं है, क्योंकि वे सब अपील के मामले में याची को दोषी सिद्ध कर रहे थे। मालूम हो कि याची पर लगाए गए आरोप इतने भी गंभीर नहीं थे कि जिसके कारण उनके खिलाफ इतनी कठोर विभागीय कार्यवाही की जाए। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि आर्बिट्रेटर द्वारा घोषित अवार्ड के खिलाफ अपील दाखिल नहीं की जा सकती है।

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