Kanpur News: कलावा देखकर छांटा हिंदू शिकार, फिर रिटायर्ड प्रधानाचार्य को आतंकियों ने मारी थी गोली, जानें- मामला
कानपुर में हाथ में कलावा देखकर रिटायर्ड प्रधानाचार्य को आतंकियों ने मारी थी गोली।
कानपुर में हाथ में कलावा देखकर रिटायर्ड प्रधानाचार्य को आतंकियों ने गोली मारी थी। विशेष न्यायाधीश एनआईए कोर्ट लखनऊ ने दोषी माना।
कानपुर, अमृत विचार। विशेष न्यायाधीश एनआईए कोर्ट लखनऊ ने जाजमऊ में रिटायर्ड प्रधानाचार्य विष्णुपुरी निवासी रमेश बाबू शुक्ला की गोली मारकर हत्या करने के मामले में आईएसआईएस खुरसान मॉड्यूल के दो आतंकियों को सोमवार को दोषी करार दिया। अदालत 11 सितंबर को दोनों को सजा सुनाएगी। जाजमऊ निवासी आतिफ मुज्जफर ने सैफुल्ला और मोहम्मद फैसल के साथ मिलकर कानपुर में प्रधानाचार्य की हत्या की थी।
सैफुल्ला लखनऊ में मुठभेड़ में मारा जा चुका है। आतिफ और मोहम्मद फैसल को कोर्ट ने हत्या में दोषी करार दिया।
विशेष अभियोजक कौशल किशोर शर्मा ने बताया कि तीनों ने प्रधानाचार्य का कत्ल करने से पहले यह सुनिश्चित किया था कि प्रधानाचार्य हिंदू है। उन्होंने प्रधानाचार्य की कलाई पर बंधे कलावा से इसकी पुष्टि की थी और फिर उनको गोली मारी थी। यह बात आतंकियों ने बयान में कबूल की थी।
सैफुल्ला के ठिकाने से बरामद हुई थी हत्यारी पिस्टल
विशेष अभियोजक कौशल किशोर शर्मा ने बताया कि प्रधानाचार्य के कत्ल में आतिफ, मोहम्मद फैसल औरसैफुल्ला शामिल थे। सैफुल्ला को एटीएस ने लखनऊ में घेर लिया था। घंटो मुठभेड़ के बाद उसे मार गिराया था। उसके ठिकाने से बरामद पिस्टल से ही प्रधानाचार्य की हत्या की गई थी। एफएसएल रिपोर्ट में इसकी पुष्टि हुई है। एटीएस ने घटना के दिन दोनों की लोकेशन चेक की तो वह जाजमऊ में ही मिली थी। एटीएस को दोनों के मोबाइल से हत्या से संबंधित मीडिया रिपोर्ट की क्लिप मिली थी। दोनों मौलाना के घर पर दर्श कार्यक्रम कर आतंकी विचारधारा का प्रसार करते थे। इसके भी सबूत एनआईए को मिले हैं।
राज्यमंत्री समेत 29 गवाहों के दर्ज हुए हैं बयान
इस मुकदमे की सुनवाई विशेष न्यायाधीश एनआईए की अदालत में चल रही है। सैफुल्ला एनकाउंटर में मारा जा चुका है। उसकी पत्रावली अलग कर दी गई है। अदालत में 61 दस्तावेजों के साथ 64 गवाहों की सूची दाखिल की गई थी। इसमें राज्य मंत्री असीम अरुण समेत 29 गवाहों के बयान दर्ज हुए हैं। राज्य मंत्री असीम अरुण उस समय एटीएस के आईजी थे। जाजमऊ निवासी मुस्लिम गवाहों ने भी अभियुक्तों के खिलाफ बयान दिए हैं। अदालत ने गवाहों के बयान और सबूतों के आधार पर दोनों को दोषी करार दिया है।
