ऑकोप्लास्टी तकनीक की जानकारी साझा करने लखनऊ में जुटेंगे विशेषज्ञ

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। स्तन कैंसर (breast cancer) एक गंभीर बीमारी है। जिससे दुनिया की एक बड़ी आबादी प्रभावित होती है। स्तर कैंसर यानी ब्रेस्ट कैंसर न सिर्फ शारीरिक रूप से लोगों को परेशान करता है बल्कि सामाजिक और आर्थिक रूप से भी तोड़ने के लिए जिम्मेदार होता है। महिलाओं को सबसे ज्यादा यह बीमारी प्रभावित करती है, लेकिन स्तन कैंसर से जूझ रही महिलाओं के लिए ऑकोप्लास्टी तकनीक काफी कारगर साबित हो रही है। इसी तकनीक को बढ़ावा देने के लिए किंगजार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय स्थित इण्डोक्राइन सर्जरी विभाग के प्रो.आनंद मिश्रा लगातार प्रयासरत है। इसी के तहत इण्डोक्राइन सर्जरी विभाग की तरफ से दो दिवसीय केजीएमयू ब्रेस्ट अपडेट -2023 का आयोजन किया जा रहा है। 8 और 9 सितम्बर को होने वाले इस कार्यक्रम में देशभर से करीब 77 विशेषज्ञ हिस्सा लेंगे जो ऑकोप्लास्टी तकनीक की जानकारी साझा करेंगे। वहीं इस विधि को सीखने के लिए उत्तर प्रदेश के करीब 100 जनरल सर्जन जुटेंगे।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के इण्डोक्राइन सर्जरी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. आनंद मिश्रा ने बताया कि केजीएमयू ब्रेस्ट अपडेट-2023 का आयोजन इंडियन एंटी कैसर ट्रस्ट, एसोसिएशन ऑफ ब्रेस्ट सर्जन ऑफ इंडिया तथा उत्तर प्रदेश चैप्टर ऑफ एसोसिएशन सर्जन ऑन इडिया के सहयोग से किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि दुनिया भर में ब्रेस्ट कैंसर के मामले बढ़ते जा रहे है। हालांकि इस दौरान स्तन कैंसर के प्रति लोगों में जागरुकता भी बढ़ रही है। जिसके चलते ब्रेस्ट कैंसर के मरीजों की प्रारंभिक चरण में जानकारी होने के फलस्वरुप मरीजों के स्तन को बचाया जा सकता है। कीमोथेरेपी के माध्यम से एडवान्स स्टेज के मरीजों के स्तन को भी बचाया जा सकता है। इण्डोक्राइन सर्जरी विभाग की तरफ से केजीएमयू ब्रेस्ट अपडेट प्रतिवर्ष एक वार्षिक कार्यक्रम के रुप में आयोजित किया जाता है। यह कार्यक्रम 2021 से प्रति वर्ष आयोजित किया जा रहा है, इस वर्ष भी राष्ट्रीय स्तर पर सम्पूर्ण देश के संकाय सदस्यो तथा प्रतिनिधियों द्वारा प्रतिभाग किया जायेगा तथा अपनी अपनी विशेषज्ञता के माध्यम से लोगो को जानकारी प्रदान की जायेगी। 

क्या है ऑकोप्लास्टी तकनीक

डॉ. आनंद मिश्रा ने बताया कि ऑकोप्लास्टी तकनीकी से स्तन कैंसर का ऑपरेशन एवं साथ ही साथ प्लास्टिक सर्जरी तकनीकी से वही सर्जन उस स्तन को दूसरे स्तन के सापेक्ष सुडौल बना देता है। सामान्यता ऑपरेशन में स्तन का भाग 20 प्रतिशत से कम निकाला जाए तो स्तन को सुडौल रहता है, स्तन का भाग 20 प्रतिशत  से अधिक निकालने पर प्रतिपूर्ति करने के लिए विभिन्न फलैप लगाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि स्तन के बगल, पीठ या पेट से फलैप बनाये जाते है। इसी तकनीक की जानकारी साझा करने के लिए इस कार्यक्रम के सारे विषेशज्ञ विभिन्न ऑकोप्लास्टी तकनीक की जानकारी वीडियो के माध्यम से साझा करेंगे। दोनों दिन के सभी सत्र ब्रेस्ट सर्जरी प्रैक्टिस करने वाले सर्जन के लिये उपयोगी एवं महात्वपूर्ण होगा।

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